अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना से पढ़ेंगे बड़े स्कूलों में मजदूर परिवार के बच्चे

देश में छत्तीसगढ़ ऐसा पहला राज्य है, जिसने शिक्षा के लिए एक नई इबारत लिखी है जहां अटल उत्कृष्ट योजना से मजदूर परिवार के होशियार बच्चों को बड़े नामी स्कूलों में पढ़ाया जाएगा।

राज्य के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय एवं श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन की पहल पर शुरू की गई “अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना” ने उन परिवारों में नई उम्मीद जगाई है, जो अब तक आर्थिक तंगी के कारण बच्चों को बड़े स्कूलों में दाखिला दिलाने का सपना भी नहीं देख पाते थे।इस योजना के तहत प्रदेश भर से चुनिंदा 100 बच्चों का 14 बड़े नामी निजी स्कूलों में दाखिला कराया जाएगा कराया गया है। खास बात यह है कि बच्चों के 6वीं कक्षा से लेकर 12वीं तक की पूरी पढ़ाई का खर्च श्रम विभाग खुद उठाएगा। विभाग ने जानकारी दी है कि फिलहाल इस पहल पर सालाना करीब दो करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना आवेदन प्रक्रिया

2025 में पहली बार छत्तीसगढ़ में लागू की गई इस योजना के लिए आवेदन

  • सिर्फ छत्तीसगढ़ प्रदेश के जिला श्रम कार्यालयों से भरे जाएंगे
  • नियमों के मुताबिक केवल मजदूरों के पहले दो बच्चों को ही योजना का लाभ मिल सकता है
  • आवेदन के साथ अभ्यर्थियों को मजदूर कार्ड और 5वीं कक्षा की मार्कशीट जमा करनी होगी
  • इसके बाद प्रत्येक जिले में मेरिट लिस्ट तैयार होगी
  • अंत में राज्य स्तरीय समिति ने 100 बच्चों का चयन किया जाया करेगा

योजना के तहत किसी एक स्कूल में अधिकतम सात बच्चों को ही प्रवेश दिया गया है, ताकि सभी जिलों से योग्य बच्चों को समान अवसर मिल सके। इस बार कुल 800 से अधिक आवेदन आए थे, जिनमें से मेरिट के आधार पर चयन किया गया। श्रम विभाग का कहना है कि आने वाले सालों में सीटों की संख्या और बढ़ाने का प्रयास होगा।

शिक्षा का नया माहौल

श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन ने कहा कि अगर समाज में वास्तविक परिवर्तन लाना है तो अगली पीढ़ी को नई पृष्ठभूमि और वातावरण से जोड़ना जरूरी है। मजदूर परिवारों के बच्चे अब उन स्कूलों में पढ़ पाएंगे जहां पहले आर्थिक कारणों से दाखिला लेना संभव नहीं था। सरकार का मानना है कि अच्छे माहौल और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से ये बच्चे अपने परिवार की पीढ़ियों को बदल सकेंगे।योजना के तहत हर बच्चे पर सालाना लगभग 2 लाख रुपये खर्च होंगे। यह रकम फीस, किताबें, यूनिफॉर्म और अन्य जरूरी शैक्षणिक जरूरतों पर खर्च की जाएगी। इसका पूरा जिम्मा छग भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल और श्रम विभाग ने उठाया है।

छत्तीसगढ़ (RTE) से अलग है योजना

गौर करने वाली बात यह है कि यह योजना शिक्षा के अधिकार (RTE) से बिल्कुल अलग है। आरटीई में किसी भी बीपीएल परिवार के बच्चे को निजी स्कूलों में प्रवेश का अधिकार मिलता है, लेकिन “अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना” में केवल मजदूरों के बच्चे ही पात्र होंगे। यानी इस बार सीधा फायदा उन्हीं परिवारों को मिलेगा जो ईंट-भट्टों, निर्माण कार्यों और अन्य श्रमिक क्षेत्र से जुड़े हैं।

यह पहल उन मजदूर परिवारों के लिए बड़ी राहत है, जो अब तक अपने बच्चों को नामी स्कूलों के बाहर से ही देखते रह जाते थे। अब उनके बच्चे भी वही किताबें पढ़ेंगे, वही कक्षाएं जॉइन करेंगे और वही माहौल पाएंगे, जो आमतौर पर आर्थिक रूप से सक्षम परिवारों के बच्चों को मिलता है।

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