ज्योतिरादित्य सिंधिया को लेकर दिग्विजय और कमलनाथ में टकरार

24 अगस्त को मध्य प्रदेश 2020 में ज्योतिरादित्य सिंधिया द्वारा गिरा दी गई कांग्रेस की सरकार को लेकर 5 साल बाद आरोप प्रत्यारोप लगना शुरू हो गए हैं ! मध्य प्रदेश के दोनों कांग्रेस मुख्यमंत्री रहे दिग्विजय सिंह और कमलनाथ के राजनीतिक टकराव अब आमने-सामने आ गए है

आपको बता दे कि नवंबर-दिसंबर 2018 में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने लंबे अंतराल के बाद सत्ता में वापसी की थी। चुनावी नतीजों ने कांग्रेस को मजबूत स्थिति में पहुंचाया और पार्टी ने बहुमत हासिल कर लिया। तब दिल्ली से लेकर भोपाल तक चर्चा थी कि आखिर मुख्यमंत्री कौन बनेगा—ज्योतिरादित्य सिंधिया या कमलनाथ। अंततः पार्टी हाईकमान ने कमलनाथ पर भरोसा जताया और उन्हें मुख्यमंत्री बना दिया।

उस समय गुना से कॉंग्रेस के सांसद रहे ज्योतिरादित्य सिंधिया को पार्टी और सरकार में पर्याप्त महत्व न मिलने की शिकायत रही। वे खुद को और उनके द्वारा लिए गए जनता के वोटो उपेक्षित महसूस कर रहे थे । यह नाराज़गी समय के साथ बढ़ती गई और आखिरकार 2020 में एक बड़े राजनीतिक भूचाल में बदल गई।

मार्च 2020 में सिंधिया ने बड़ा फैसला लिया। उन्होंने अपने 22 समर्थक विधायकों के साथ कांग्रेस से इस्तीफा देकर बीजेपी का दामन थाम लिया। यह कदम मध्य प्रदेश की राजनीति के लिए ऐतिहासिक मोड़ साबित हुआ। कमलनाथ की सरकार अल्पमत में आ गई और उन्हें मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा। इसके बाद बीजेपी ने शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में सत्ता संभाली।

लेकिन इतना सब होने के बाद 5 साल तक सिंधिया, दिग्विजय या कमलनाथ कुछ नहीं बोल पर कुछ समय पहले एक न्यूज़ चैनल में दिग्विजय सिंह से मध्य प्रदेश में गिरी 2020 की सरकार को लेकर सवाल पूछा गया जहां उन्होंने उसका उत्तर दिया जिस के बाद कमलनाथ और दिग्विजय सिंह की राजनीतिक मनमुटाव सार्वजनिक हो गए

क्या बोले दिग्विजय

पांच साल बाद बंद कमरे वाली यह बात अब सार्वजनिक हुई दिग्विजय सिंह ने कमलनाथ को जिम्मेदार ठहराया

उन्होंने ने कहा कि एक बड़े उद्योगपति हैं, जिनके कमल नाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया से अच्छे संबंध हैं। मैं उनके पास जाकर कहा कि इन दोनों की लड़ाई में हमारी सरकार गिर जाएगी। आप दोनों को संभालिए फिर उद्योगपति के घर डिनर पर कमल नाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया मिले। मैं भी वहां मौजूद था। कोशिश की गई कि मामला निपट जाए। वहीं, जिन मुद्दों पर वहां बात हुई, उसका पालन नहीं हुआ। मेरे सतत प्रयासों के बाद भी पालन नहीं हुआ। दिग्विजय सिंह ने कहा कि वे बातें छोटी-मोटी थीं, ग्वालियर-चंबल संभाग में हम जैसा कहेंगे, वैसा कर दीजिए। हम और ज्योतिरादित्य सिंधिया एक पेपर पर दस्तख्त करके दे दी। उसका पालन नहीं हुआ और क्लैश का कारण बना।

कमलनाथ ने किया पलटवार

लेकिन कमलनाथ ने दिग्विजय सिंह की बातों को ना करते हुए अपने सोशल मीडिया से पोस्ट सार्वजनिक करते हुए कहा की मध्य प्रदेश में 2020 में मेरे नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार गिरने को लेकर हाल ही में कुछ बयानबाजी की गई है। मैं सिर्फ़ इतना कहना चाहता हूँ कि पुरानी बातें उखाड़ने से कोई फ़ायदा नहीं। लेकिन यह सच है कि व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा के अलावा श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को यह लगता था कि सरकार श्री दिग्विजय सिंह चला रहे हैं। इसी नाराज़गी में उन्होंने कांग्रेस के विधायकों को तोड़ा और हमारी सरकार गिरायी।

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