नितिन गडकरी का मध्यप्रदेश को तोहफा 20,000 करोड़

केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने शनिवार को जबलपुर में प्रदेश को दो बड़े तोहफे दिए उन्होंने घोषणा की कि प्रदेश में करीब 20,500 करोड़ रुपये की लागत से दो मेगा प्रोजेक्ट तैयार होंगे। इन प्रोजेक्ट्स से न सिर्फ़ सड़क यातायात आसान होगा बल्कि प्रदेश के पर्यटन, रोजगार और अर्थव्यवस्था को भी नई उड़ान मिलेगी । । मध्यप्रदेश में 5,500 करोड़ की लागत से चार टाइगर रिजर्व कान्हा, बांधवगढ़, पन्ना और पेंच को जोड़ने वाला फोर लेन कॉरिडोर बनाया जाएगा। वहीं, भोपाल-जबलपुर के बीच 255 किमी लंबा ग्रीनफील्ड हाईवे भी तैयार होगा। इस पर करीब 15,000 करोड़ रुपए खर्च होंगे।। यह हाईवे 8 लेन का होगा, लेकिन भविष्य में इसे 4 लेन और बढ़ाने की सुविधा रहेगी।

ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे पर वाहन 120 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ सकेंगे। अभी भोपाल से जबलपुर का सफर 5 घंटे का है, जो एक्सप्रेस-वे बनने के बाद घटकर 3 घंटे का रह जाएगा। यह नया रास्ता बस्ती वाले इलाकों से अलग निकाला जाएगा, जिससे शहरों के ट्रैफिक से जाम नहीं लगेगा। एक्सप्रेस-वे पूरी तरह नई और अविकसित भूमि (ग्रीनफील्ड) पर बनेगा। इससे जमीन अधिग्रहण की लागत भी कम होगी और निर्माण जल्दी होगा।

गडकरी ने बताया कि प्रोजेक्ट की डीपीआर दिसंबर तक तैयार हो जाएगी। अगर प्रदेश सरकार तेजी से जमीन अधिग्रहण कर ले तो काम अगले साल अप्रैल से शुरू हो सकता है।

दो बड़े शहरों से जुड़ेगा भोपाल

भोपाल-इंदौर के बीच 107 किमी का ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे पहले ही घोषित हो चुका है। इस पर करीब 12,000 करोड़ की लागत आएगी। यह मौजूदा स्टेट हाईवे से पूरी तरह अलग मार्ग होगा। इसके किनारे 6 इंडस्ट्रियल कॉरिडोर और हाटपिपल्या में लॉजिस्टिक एयरपोर्ट प्रस्तावित है। और अब भोपाल-जबलपुर के बीच 255 किमी लंबा ग्रीनफील्ड हाईवे भी तैयार होगा

टाइगर कॉरिडोर क्यों जरूरी है?

  • मध्यप्रदेश को ‘टाइगर स्टेट’ कहा जाता है क्योंकि यहां देश में सबसे ज्यादा बाघ हैं।
  • अलग-अलग रिजर्व्स को जोड़ने से वन्यजीव संरक्षण और इको-टूरिज्म दोनों को फायदा होगा।
  • इससे टूरिस्ट सर्किट मजबूत होगा और महाकौशल क्षेत्र को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी।
  • • साथ ही स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

नितिन गडकरी का यह ऐलान सच में मध्यप्रदेश के लिए डबल गिफ्ट है। एक तरफ भोपाल-जबलपुर एक्सप्रेस-वे से सफर का समय घटेगा और यात्रा आसान होगी, वहीं दूसरी तरफ टाइगर कॉरिडोर से पर्यटन और रोजगार में जबरदस्त बढ़ोतरी होगी। अगर ये दोनों प्रोजेक्ट समय पर पूरे हो गए तो आने वाले सालों में मध्यप्रदेश की सड़कों और पर्यटन की तस्वीर पूरी तरह बदल जाएगी।

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