सूरत में युवक बना मध्य प्रदेश का ‘डिप्टी सीएम’, रेलवे पुलिस ने पकड़ा फर्जीवाड़ा

नाम – रणजीत यादव
उम्र – 21 साल
निवासी – मध्य प्रदेश जिला सतना

गुजरात के सूरत से एक अजीबो-गरीब मामला सामने आया है जिसने मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला तक को हैरान कर दिया। मामला सूरत रेलवे स्टेशन का है, जहां मध्य प्रदेश के सतना जिले का रहने वाला 21 वर्षीय युवक रणजीत यादव फर्जीवाड़ा करते हुए पकड़ा गया। दरअसल, रणजीत यादव सूरत में मजदूरी करता है। 29 अगस्त को सूरत रेलवे स्टेशन पर उसे बिना टिकट यात्रा करते हुए पकड़ लिया। कुछ देर पूछताछ के बाद उसे समझाइश देकर छोड़ भी दिया गया

फिर शुरू किया ड्रामा

लेकिन इसके बाद जो हुआ, उसने RPF अधिकारियों को चौंका दिया।
जैसे ही वह स्टेशन से निकला, रणजीत ने मुंबई कंट्रोल रूम पर फोन लगाकर RPF ड्यूटी ऑफिसर का नंबर मांगा। कंट्रोल रूम ने उसे उपनिरीक्षक कुलदीप सिंह का नंबर दिया। इसके बाद रणजीत ने सीधे कुलदीप सिंह को फोन किया और खुद को मध्य प्रदेश का डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला बताते हुए कहा—
“आपने मेरे परिचित रणजीत यादव को पकड़ा है, उसे तुरंत छोड़ दीजिए। मेरे आदमी को रोकने की हिम्मत कैसे की?” यह सुनकर कुलदीप सिंह आचार्य में हो गए की एक मामूली व्यक्ति के लिए उपमुख्यमंत्री फोन कैसे लगा सकता है

खुला युवक का फर्जीवाड़ा

फोन पर डिप्टी सीएम की तरह रौब झाड़ रहे रणजीत यादव की बात सुनकर उपनिरीक्षक को शक हुआ। उन्होंने तुरंत छानबीन शुरू की तो पता चला कि यह वही युवक है जिसे टिकट न होने पर पकड़ा गया था। जिसके बाद यह मामला GRP को दे दिया गया जहां उन्होंने इस पूरे मामले की जांच की और रणजीत को दोबारा बुलाकर शक्ति से पूछताछ की।
पकड़े जाने पर रणजीत ने कबूल किया कि उसने ही खुद को डिप्टी सीएम बनकर फोन किया था। यही नहीं, उसके मोबाइल से चौंकाने वाली जानकारी मिली। जहां उसके मोबाइल में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री और मंत्रियों के साथ-साथ कई बड़े अधिकारियों के नंबर सेव थे यहां तक कि उसकी व्हाट्सएप प्रोफाइल पर उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला की तस्वीर लगी हुई थी।

कौन है राजेंद्र शुक्ला

गौरतलब है कि जिस नाम का फर्जी इस्तेमाल रणजीत कर रहा था, वह वास्तव में मध्य प्रदेश भाजपा के कद्दावर नेता हैं। राजेंद्र शुक्ला रीवा विधानसभा से विधायक हैं और चार बार मध्य प्रदेश के मंत्री रह चुके हैं। वर्तमान में वे मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पद पर कार्यरत हैं। बघेलखंड क्षेत्र, जिसमें रीवा और सतना दोनों जिले आते हैं, जिसमें उनकी गहरी पकड़ और लोकप्रियता मानी जाती है।

एक मामूली टिकट चेकिंग से शुरू हुआ मामला फर्जीवाड़े तक जा पहुंचा। अब रणजीत यादव जेल की सलाखों के पीछे है, जबकि RPF और GRP ने इस पूरे प्रकरण को लेकर उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट भेज दी है।

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