
देश के मशहूर उद्योगपति और रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी के छोटे भाई अनिल अंबानी एक बार फिर सुर्खियों में हैं। 23 अगस्त केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने उनके घर और Reliance Communications (RCOM) से जुड़े कई दफ्तरों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई सीधे तौर पर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की शिकायत पर आधारित है, जिसमें अब CBI ने FIR भी दर्ज कर ली है। अनिल अंबानी और उनकी कंपनी पर लगभग ₹2,929 करोड़ बैंक फ्रॉड का आरोप लगाया गया है।
इससे पहले 23 जुलाई को (ED) ने भी अनिल अंबानी और उनकी कंपनियों पर शिकंजा काश था 23 जुलाई 2025 को ही ED ने अनिल अंबानी के सहयोगियों और कंपनियों के 35 से अधिक ठिकानों पर छापेमारी की थी। अब CBI का यह एक्शन जांच को और गंभीर बना देता है।
किन धाराओं पर FIR?
CBI ने इस मामले में अनिल अंबानी और उनकी कंपनी Reliance Communications (RCOM) के खिलाफ आपराधिक साजिश (IPC 120B), धोखाधड़ी (IPC 420) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत FIR दर्ज की है।
- SBI से लिए गए कर्ज का गलत इस्तेमाल किया गया।
- बड़ी रकम का बिजनेस में वास्तविक उपयोग नहीं हुआ।
- कर्ज लौटाने से जानबूझकर बचा गया जिससे बैंक को भारी नुकसान हुआ।
SBI ने लगाया फ्रॉड का ठप्पा
सरकारी बैंक (SBI) ने 13 जून 2025 को रिलायंस कम्युनिकेशंस और अनिल अंबानी को फ्रॉड (Fraud Account) घोषित किया था। संसद में पेश डाटा के अनुसार, बैंक का कुल एक्सपोज़र लगभग ₹3,073 करोड़ है। इसमें करीब ₹2,227 करोड़ की मूल राशि और ₹786 करोड़ की बैंक गारंटी शामिल है। चूंकि यह लोन लंबे समय से डिफॉल्ट में था और इसके उपयोग में गड़बड़ियां पाई गईं, इसलिए बैंक ने सीधे CBI को केस सौंपा।
इसी आधार पर CBI ने FIR दर्ज की और 23 अगस्त की सुबह अनिल अंबानी के आवास व कार्यालयों पर CBI Raids शुरू हुईं। इस दौरान उनके परिवार के सदस्य भी घर पर मौजूद थे।
1983 में रिलायंस से जुड़े थे Anil ambani

जून 2005 मे मुकेश अंबानी और अनिल अंबानी के बीच बंटवारे हुआ , लेकिन किस भाई को कौन सी कंपनी मिलेगी इसका फैसला 2006 तक चला
मुकेश अंबानी 1981 और अनिल अंबानी 1983 में रिलायंस से जुड़े थे। जुलाई 2002 में धीरूभाई अंबानी का निधन हो गया। वो वसीयत लिख कर नहीं गए थे। मुकेश अंबानी रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन और अनिल अंबानी मैनेजिंग डायरेक्टर बने। नवंबर 2004 में पहली बार दोनों भाइयों का झगड़ा सामने आया था। परिवार में चल रहे इस विवाद से धीरूभाई अंबानी की पत्नी कोकिलाबेन परेशान थीं, जिसके बाद कोकिलाबेन ने बिजनेस का बंटवारा किया गया था।
मुकेश अंबानी के हिस्से में
बंटवारे के बाद मुकेश अंबानी के हिस्से में पेट्रोकेमिकल्स के कारोबार, रिलायंस इंडस्ट्रीज, इंडियन पेट्रोल कैमिकल्स कॉर्प लिमिटेड, रिलायंस पेट्रोलियम, रिलायंस इंडस्ट्रियल इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड जैसी कंपनियां आईं।
अनिल अंबानी के हिस्से में
छोटे भाई अनिल के पास आरकॉम, रिलायंस कैपिटल, रिलायंस एनर्जी, रिलायंस नेचुरल रिसोर्सेज जैसी कंपनियां थीं। इसके बाद मुकेश की लीडरशिप वाली कंपनियां लगातार ग्रो कर रही हैं, जबकि अनिल के हिस्से आई कंपनियों की हालत खराब होती गई और भी कई अधिक कर्ज में डूबते हुए चले गए !
23 अगस्त 2025 को हुई यह CBI Raid on Anil Ambani सिर्फ एक छापेमारी भर नहीं है, बल्कि भारतीय बैंकिंग सेक्टर को झकझोर देने वाला मामला है। ₹2,929 करोड़ SBI Loan Fraud Case और ₹17,000 करोड़ ED Probe दोनों मिलकर अब देश की बड़ी कॉर्पोरेट धोखाधड़ी जांचों में से एक बन गए हैं। जहां SBI ने साफ शब्दों में अनिल अंबानी और उनकी कंपनी को फ्रॉड अकाउंट घोषित किया, वहीं CBI और ED की यह संयुक्त कार्रवाई दिखाती है कि भारतीय एजेंसियां अब बड़े उद्योगपतियों के खिलाफ भी सख्ती बरतने में पीछे नहीं हटेंगी।