ज्योतिरादित्य सिंधिया को लेकर दिग्विजय और कमलनाथ में टकरार

24 अगस्त को मध्य प्रदेश 2020 में ज्योतिरादित्य सिंधिया द्वारा गिरा दी गई कांग्रेस की सरकार को लेकर 5 साल बाद आरोप प्रत्यारोप लगना शुरू हो गए हैं ! मध्य प्रदेश के दोनों कांग्रेस मुख्यमंत्री रहे दिग्विजय सिंह और कमलनाथ के राजनीतिक टकराव अब आमने-सामने आ गए है

आपको बता दे कि नवंबर-दिसंबर 2018 में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने लंबे अंतराल के बाद सत्ता में वापसी की थी। चुनावी नतीजों ने कांग्रेस को मजबूत स्थिति में पहुंचाया और पार्टी ने बहुमत हासिल कर लिया। तब दिल्ली से लेकर भोपाल तक चर्चा थी कि आखिर मुख्यमंत्री कौन बनेगा—ज्योतिरादित्य सिंधिया या कमलनाथ। अंततः पार्टी हाईकमान ने कमलनाथ पर भरोसा जताया और उन्हें मुख्यमंत्री बना दिया।

उस समय गुना से कॉंग्रेस के सांसद रहे ज्योतिरादित्य सिंधिया को पार्टी और सरकार में पर्याप्त महत्व न मिलने की शिकायत रही। वे खुद को और उनके द्वारा लिए गए जनता के वोटो उपेक्षित महसूस कर रहे थे । यह नाराज़गी समय के साथ बढ़ती गई और आखिरकार 2020 में एक बड़े राजनीतिक भूचाल में बदल गई।

मार्च 2020 में सिंधिया ने बड़ा फैसला लिया। उन्होंने अपने 22 समर्थक विधायकों के साथ कांग्रेस से इस्तीफा देकर बीजेपी का दामन थाम लिया। यह कदम मध्य प्रदेश की राजनीति के लिए ऐतिहासिक मोड़ साबित हुआ। कमलनाथ की सरकार अल्पमत में आ गई और उन्हें मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा। इसके बाद बीजेपी ने शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में सत्ता संभाली।

लेकिन इतना सब होने के बाद 5 साल तक सिंधिया, दिग्विजय या कमलनाथ कुछ नहीं बोल पर कुछ समय पहले एक न्यूज़ चैनल में दिग्विजय सिंह से मध्य प्रदेश में गिरी 2020 की सरकार को लेकर सवाल पूछा गया जहां उन्होंने उसका उत्तर दिया जिस के बाद कमलनाथ और दिग्विजय सिंह की राजनीतिक मनमुटाव सार्वजनिक हो गए

क्या बोले दिग्विजय

पांच साल बाद बंद कमरे वाली यह बात अब सार्वजनिक हुई दिग्विजय सिंह ने कमलनाथ को जिम्मेदार ठहराया

उन्होंने ने कहा कि एक बड़े उद्योगपति हैं, जिनके कमल नाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया से अच्छे संबंध हैं। मैं उनके पास जाकर कहा कि इन दोनों की लड़ाई में हमारी सरकार गिर जाएगी। आप दोनों को संभालिए फिर उद्योगपति के घर डिनर पर कमल नाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया मिले। मैं भी वहां मौजूद था। कोशिश की गई कि मामला निपट जाए। वहीं, जिन मुद्दों पर वहां बात हुई, उसका पालन नहीं हुआ। मेरे सतत प्रयासों के बाद भी पालन नहीं हुआ। दिग्विजय सिंह ने कहा कि वे बातें छोटी-मोटी थीं, ग्वालियर-चंबल संभाग में हम जैसा कहेंगे, वैसा कर दीजिए। हम और ज्योतिरादित्य सिंधिया एक पेपर पर दस्तख्त करके दे दी। उसका पालन नहीं हुआ और क्लैश का कारण बना।

कमलनाथ ने किया पलटवार

लेकिन कमलनाथ ने दिग्विजय सिंह की बातों को ना करते हुए अपने सोशल मीडिया से पोस्ट सार्वजनिक करते हुए कहा की मध्य प्रदेश में 2020 में मेरे नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार गिरने को लेकर हाल ही में कुछ बयानबाजी की गई है। मैं सिर्फ़ इतना कहना चाहता हूँ कि पुरानी बातें उखाड़ने से कोई फ़ायदा नहीं। लेकिन यह सच है कि व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा के अलावा श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को यह लगता था कि सरकार श्री दिग्विजय सिंह चला रहे हैं। इसी नाराज़गी में उन्होंने कांग्रेस के विधायकों को तोड़ा और हमारी सरकार गिरायी।

30 दिन की हिरासत के साथ मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री का जाएगा पद

देश की राजनीति में इन दिनों एक नया कानून चर्चा का सबसे गर्म मुद्दा बना हुआ है। 130वां संविधान संशोधन विधेयक, 2025 संसद में पेश हुआ है और इसके प्रावधानों ने सत्ता और विपक्ष दोनों खेमों में हड़कंप मचा दिया है। वजह साफ है—इस विधेयक के मुताबिक अगर कोई प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री किसी गंभीर अपराध में गिरफ्तार होकर लगातार 30 दिनों तक जेल या हिरासत में रहता है, तो उसे पद से इस्तीफा देना होगा। अगर वह इस्तीफा नहीं देता, तो 31वें दिन उसका पद अपने आप खत्म हो जाएगा।यह प्रस्ताव जितना सख्त है, उतना ही सवालों से घिरा भी है। आइए, जानते हैं पूरी कहानी।

गृह मंत्री अमित शाह ने 20 अगस्त 2025 को लोकसभा में तीन बड़े विधेयक पेश किए। इनमें सबसे ज्यादा चर्चा है 130वां संविधान संशोधन बिल।

इसके अनुसार

  • कोई भी प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री अगर ऐसे अपराध में आरोपी है जिसमें कम से कम 5 साल की सजा हो सकती है, और गिरफ्तारी के बाद उसकी हिरासत लगातार 30 दिनों तक चलती है
  • तो 31वें दिन प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री पद राष्ट्रपति और राज्यपाल द्वारा हटा दिया जाएगा।
  • हालांकि, अगर अदालत बाद में उसे निर्दोष साबित करती है, तो वह नेता फिर से मंत्री पद पा सकता है।
  • यानी, इस कानून का मकसद सीधे-सीधे यह है कि जेल से शासन चलाने की परंपरा खत्म हो।

संयुक्त संसदीय समिति (JPC)

यह बात ध्यान रखने वाली है कि फिलहाल यह सिर्फ प्रस्ताव है। लोकसभा ने इसे सीधे पास नहीं किया बल्कि संयुक्त संसदीय समिति (JPC) को भेजा है। वहां सभी दलों की राय लेकर, विवादित हिस्सों पर चर्चा करके ही इसे अंतिम रूप दिया जाएगा।यानी अभी यह कानून नहीं बना है, बल्कि प्रक्रिया की शुरुआती स्टेज में है।

विपक्ष का गुस्सा

विपक्षी दल इस विधेयक को लेकर सरकार पर हमलावर हैं। इसे “मध्ययुगीन राजनीति” बताया और आरोप लगाया कि यह कानून विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने के लिए लाया गया है। कई दलों ने कहा कि यह कानून केंद्र सरकार को बहुत ज्यादा ताकत दे देगा, और भविष्य में इसका गलत इस्तेमाल हो सकता है।

सरकार का पक्ष

गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में साफ कहा कि यह कानून राजनीति में जवाबदेही और नैतिकता को बढ़ाने के लिए है। उन्होंने कहा, “कई बार देखने में आता है कि नेता जेल से भी सत्ता संभालते रहते हैं। जनता के लिए यह ठीक नहीं। नया कानून इसका अंत करेगा।”इस कानून से प्रधानमंत्री को भी कोई छूट नहीं मिलेगी। यानी अगर उन पर भी ऐसा मामला होता है, तो नियम उनके लिए भी लागू होगा।

दिलचस्प बात यह है कि चुनाव रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर ने भी इस कानून का समर्थन किया और कहा कि यह कदम भ्रष्ट नेताओं पर लगाम लगाने के लिए जरूरी है।

वहीं दूसरी तरफ पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस विधेयक को लेकर केंद्र सरकार और बीजेपी पर हमला बोला है। उन्होंने कहा की यह संशोधन विधेयक को ‘सुपर-इमरजेंसी’ से भी आगे का कदम है, जो भारत में लोकतांत्रिक युग को हमेशा के लिए समाप्त कर देगा उन्होंने मोदी सरकार के इस विधेयक का उद्देश्य न्यायपालिका की स्वतंत्रता को समाप्त करना है और इसके जरिए मौजूदा केंद्र सरकार ‘एक व्यक्ति-एक पार्टी-एक सरकार’ सिस्टम को मजबूत करने का प्रयास है।

क्या रहेगी इस पर राय

देखा जाए तो इस विधेयक का उद्देश्य पारदर्शिता और जवाबदेही लाना है। लेकिन राजनीति के माहौल में, जहां सत्ता और विपक्ष के बीच टकराव आम बात है, वहां इसके गलत इस्तेमाल का खतरा भी उतना ही बड़ा है।अगर यह कानून लागू होता है, तो भारत की राजनीति में यह एक ऐतिहासिक मोड़ होगा। लेकिन इसके साथ-साथ सरकार को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि कानून का इस्तेमाल न्याय के लिए हो, न कि राजनीति के लिए।

नितिन गडकरी का मध्यप्रदेश को तोहफा 20,000 करोड़

केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने शनिवार को जबलपुर में प्रदेश को दो बड़े तोहफे दिए उन्होंने घोषणा की कि प्रदेश में करीब 20,500 करोड़ रुपये की लागत से दो मेगा प्रोजेक्ट तैयार होंगे। इन प्रोजेक्ट्स से न सिर्फ़ सड़क यातायात आसान होगा बल्कि प्रदेश के पर्यटन, रोजगार और अर्थव्यवस्था को भी नई उड़ान मिलेगी । । मध्यप्रदेश में 5,500 करोड़ की लागत से चार टाइगर रिजर्व कान्हा, बांधवगढ़, पन्ना और पेंच को जोड़ने वाला फोर लेन कॉरिडोर बनाया जाएगा। वहीं, भोपाल-जबलपुर के बीच 255 किमी लंबा ग्रीनफील्ड हाईवे भी तैयार होगा। इस पर करीब 15,000 करोड़ रुपए खर्च होंगे।। यह हाईवे 8 लेन का होगा, लेकिन भविष्य में इसे 4 लेन और बढ़ाने की सुविधा रहेगी।

ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे पर वाहन 120 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ सकेंगे। अभी भोपाल से जबलपुर का सफर 5 घंटे का है, जो एक्सप्रेस-वे बनने के बाद घटकर 3 घंटे का रह जाएगा। यह नया रास्ता बस्ती वाले इलाकों से अलग निकाला जाएगा, जिससे शहरों के ट्रैफिक से जाम नहीं लगेगा। एक्सप्रेस-वे पूरी तरह नई और अविकसित भूमि (ग्रीनफील्ड) पर बनेगा। इससे जमीन अधिग्रहण की लागत भी कम होगी और निर्माण जल्दी होगा।

गडकरी ने बताया कि प्रोजेक्ट की डीपीआर दिसंबर तक तैयार हो जाएगी। अगर प्रदेश सरकार तेजी से जमीन अधिग्रहण कर ले तो काम अगले साल अप्रैल से शुरू हो सकता है।

दो बड़े शहरों से जुड़ेगा भोपाल

भोपाल-इंदौर के बीच 107 किमी का ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे पहले ही घोषित हो चुका है। इस पर करीब 12,000 करोड़ की लागत आएगी। यह मौजूदा स्टेट हाईवे से पूरी तरह अलग मार्ग होगा। इसके किनारे 6 इंडस्ट्रियल कॉरिडोर और हाटपिपल्या में लॉजिस्टिक एयरपोर्ट प्रस्तावित है। और अब भोपाल-जबलपुर के बीच 255 किमी लंबा ग्रीनफील्ड हाईवे भी तैयार होगा

टाइगर कॉरिडोर क्यों जरूरी है?

  • मध्यप्रदेश को ‘टाइगर स्टेट’ कहा जाता है क्योंकि यहां देश में सबसे ज्यादा बाघ हैं।
  • अलग-अलग रिजर्व्स को जोड़ने से वन्यजीव संरक्षण और इको-टूरिज्म दोनों को फायदा होगा।
  • इससे टूरिस्ट सर्किट मजबूत होगा और महाकौशल क्षेत्र को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी।
  • • साथ ही स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

नितिन गडकरी का यह ऐलान सच में मध्यप्रदेश के लिए डबल गिफ्ट है। एक तरफ भोपाल-जबलपुर एक्सप्रेस-वे से सफर का समय घटेगा और यात्रा आसान होगी, वहीं दूसरी तरफ टाइगर कॉरिडोर से पर्यटन और रोजगार में जबरदस्त बढ़ोतरी होगी। अगर ये दोनों प्रोजेक्ट समय पर पूरे हो गए तो आने वाले सालों में मध्यप्रदेश की सड़कों और पर्यटन की तस्वीर पूरी तरह बदल जाएगी।

सरकार का वह नंबर जिससे किसानों की समस्या होगी हाल

देश के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हाल ही में किसानों के हित में एक अहम कदम उठाते हुए पहले से संचालित किसान कॉल सेंटर हेल्पलाइन नंबर 1800-180-1551 को और अधिक प्रभावी बनाने की घोषणा की है। इस टोल-फ्री नंबर का उद्देश्य किसानों की समस्याओं का तुरंत समाधान करना और उन्हें सही मार्गदर्शन देना है।

आपको बता दे की कई व्यापारी द्वारा नकली बीज खाद एवं कीटनाशक बेचने से किसानों की फसलें जड़ से ही नष्ट हो रही है इसके कारण किसानों को बेहद नुकसान उठाना पड़ रहा है ! एक आयोजित कार्यक्रम में शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सरकार नकली बीज, खाद और कीटनाशक बेचने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठा रही है। उन्होंने किसानों से अपील की कि अगर उन्हें कहीं भी ऐसी शिकायत मिले तो तुरंत इस हेल्पलाइन नंबर 1800-180-1551 पर कॉल कर इसकी सूचना दें।चौहान ने चेतावनी भरे लहजे में कहा,“बेईमानों को मैं किसी भी हालत में छोड़ूंगा नहीं। किसान भाइयों को अब लुटने नहीं दिया जाएगा।”इसके साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि बीज और खाद बनाने वाली कंपनियां अगर किसानों के साथ धोखा करती है तो उनके सरकार द्वारा लाइसेंस पर रोक लगा दी जाएगी, ताकि किसानों को केवल प्रमाणित और गुणवत्ता युक्त इनपुट्स ही मिलें।

दरअसल भारत की आधी से ज्यादा आबादी आज भी कृषि पर निर्भर है। ऐसे में नकली बीज, उर्वरक और कीटनाशक किसानों की मेहनत पर पानी फेर देते हैं। शिवराज सिंह चौहान का यह कदम न केवल किसानों को सुरक्षित करेगा, बल्कि उन्हें यह भरोसा भी देगा कि सरकार हर कदम पर उनके साथ खड़ी है।

किसानों के लिए भरोसेमंद हेल्पलाइन

किसान कॉल सेंटर (Kisan Call Centre) की शुरुआत भारत सरकार ने वर्ष 2004 में की थी। इसका मकसद था कि देशभर के किसान अपने गांव से ही फोन के माध्यम से कृषि से जुड़ी सभी जानकारी प्राप्त कर सकें। इस हेल्पलाइन की खासियत यह है कि किसान सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक किसी भी समय कॉल कर सकते हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि यह सेवा 22 स्थानीय भाषाओं में उपलब्ध है, जिससे किसान अपनी मातृभाषा में समस्या बता सकें और समाधान प्राप्त कर सकें। यदि सवाल जटिल होता है, तो किसान को सीधे विशेषज्ञ वैज्ञानिकों और ICAR के Subject Matter Specialists से जोड़ दिया जाता है।

नंबर का उपयोग

  • बहुभाषी सेवा – 22 भाषाओं में जानकारी मिलती है
  • कृषि से जुड़ा हर समाधान – खेती, मौसम, पशुपालन, मंडी भाव, सरकारी योजनाएँ
  • विशेषज्ञों से सीधा संपर्क – गंभीर सवाल पर तुरंत विशेषज्ञ जोड़ दिए जाते हैं
  • समयबद्ध सहायता – सुबह 6 से रात 10 बजे तक सक्रिय सेवा।

हो रहा है फायदा

शिवराज सिंह चौहान के इस नंबर को फिर से प्रभावित करने के बाद किसानों की समस्या आना शुरू हो गई है और उन्हें हल करने के लिए भी चौहान कड़े निर्देश दे रहे हैं

कृषि कल्याण विभाग मंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यालय के x हैंडल पर पोस्ट करते हुए बताया कि

माननीय केंद्रीय मंत्री श्री @ChouhanShivraj जी ने आज नई दिल्ली स्थित कृषि भवन में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक कर कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के विभिन्न पोर्टल और कॉल सेंटर पर आने वाली किसानों की शिकायतों की समीक्षा की।

इस दौरान केंद्रीय मंत्री जी ने किसानों की शिकायतों के सही निदान के तरीके और व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए अधिकारियों से पी.एम. किसान पोर्टल, किसान ई-मित्र, किसान कॉल सेंटर सहित विभिन्न प्लेटफार्म के जरिए मिल रही किसानों की समस्याओं की पूरी जानकारी ली और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

बैठक में केंद्रीय मंत्री जी ने कहा कि किसानों की जो भी समस्याएं विभिन्न पोर्टल्स के माध्यम से प्राप्त हो रही हैं, उनका उचित निराकरण समय पर करने की व्यवस्था होना चाहिए।

सट्टेबाजी पर कड़ा शिकंजा होगी 3 साल की जेल Online gaming bill 2025

लोकसभा में बुधवार को भारी हंगामे के बीच इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने ऑनलाइन गेमिंग प्रमोशन रेगुलेशन बिल 2025 को ध्वनिमत से पारित कर दिया पैसे लगाकर खेले जाने वाले खेलों के लिए है यह बिल ! खास बात यह रही कि इस विधेयक पर न तो कोई चर्चा हुई और न ही बहस, बावजूद इसके यह कानून बन गया। सरकार का कहना है कि इस विधेयक को तैयार करने में आईटी मंत्रालय के साथ-साथ केंद्रीय गृह मंत्रालय ने भी अहम भूमिका निभाई है।

इस कानून का मुख्य उद्देश्य

ऑनलाइन गेमिंग के नाम पर हो रही सट्टेबाजी और जुए जैसी गतिविधियों पर पूरी तरह रोक लगाना है। सरकार का दावा है कि मोबाइल में खेले जाने वाले ऐसे खेल जिसमें जीत और हर के लिए पैसे लगाए जाते हैं इन मनी गेमिंग एप्स के कारण अब तक हजारों परिवार आर्थिक नुकसान झेल चुके हैं। कई मामलों में युवा इससे होने वाले कर्ज के तनाव का शिकार होकर आत्महत्या तक कर चुके हैं । ऐसे में सरकार ने इस विधेयक को लाकर इसे सामाजिक और आर्थिक सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है।

अश्विनी वैष्णव ने कहा

अश्विनी वैष्णव ने कहा जब बात समाज की हो या उद्योग जगत की तो हमारे प्रधानमंत्री ने हमेशा समाज को चुना है उन्होंने समझते हुए कहा सरकार गेमिंग के खिलाफ नहीं है, बल्कि वह सिर्फ सट्टेबाजी और जुए के खिलाफ है.

ई-स्पोर्ट्स और सोशल गेम्स को सरकार का समर्थक

  • ई-स्पोर्ट्स (e-sports): यह कौशल, रणनीति और अभ्यास का खेल है, जैसे प्रोफेशनल क्रिकेट या शतरंज. सरकार इसका समर्थन करती है.
  • सोशल गेम्स (Social Games): ये मनोरंजन और सीखने के लिए खेले जाने वाले गेम हैं, जैसे लूडो या कोई पहेली वाला गेम. सरकार इन्हें भी बढ़ावा देना चाहती है.

प्रमोशन करने वालों पर सख्त प्रावधान

इस बिल के प्रावधानों में सबसे अहम बात यह है कि अब कोई भी सेलिब्रिटी, चाहे वह बॉलीवुड का मशहूर अभिनेता हो या क्रिकेट का बड़ा सितारा, अगर किसी रियल मनी गेमिंग एप  का प्रमोशन करेगा तो उसे 3 साल तक की जेल और 1 करोड़ रुपये तक का जुर्माना भरना होगा। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि इन सितारों के जरिए लोगों को ऐसे ऐप्स की ओर आकर्षित न किया जा सके।


इसी तरह, अगर कोई विज्ञापनदाता ऐसे गेम्स के लिए विज्ञापन प्रसारित करेगा तो उसके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई होगी। विज्ञापन चलाने वालों को दो साल की कैद और 50 लाख रुपये तक का जुर्माना देना पड़ सकता है।

बैंकिंग और पेमेंट गेटवे भी होंगे सतर्क

सरकार ने वित्तीय लेन-देन को लेकर भी बड़ा कदम उठाया है। UPI , पेटीएम और अन्य बैंकिंग या डिजिटल पेमेंट गेटवे से रियल मनी गेमिंग एप्स को जोड़ने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया जाएगा। इसका सीधा मतलब यह है कि अब ऐसे ऐप्स के जरिए लेन-देन करना न बंद होगा।

सट्टेबाजी और जुए की गतिविधियां बड़ी

दरअसल, बीते कुछ सालों में ऑनलाइन गेमिंग का दायरा तेजी से बढ़ा है। शुरुआत में इसे महज मनोरंजन का जरिया समझा गया, लेकिन धीरे-धीरे इसमें सट्टेबाजी और जुए की गतिविधियां बढ़ गईं। कई युवा ऐसे एप्स में पैसा लगाकर कर्ज के जाल में फंस गए। इंटरनेट मनी गेमिंग के कारण परिवारों की बचत तक खत्म हो गई।
खासकर बच्चों और युवाओं को इन गेम्स से दूर रखने के लिए कानूनी प्रावधान जरूरी माने जा रहे हैं इसी पृष्ठभूमि में यह बिल संसद में लाया गया और अब इसे मंजूरी मिल चुकी है।

अश्विनी वैष्णव ने कर्नाटक में प्रकाशित एक हालिया समाचार रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि सिर्फ कुछ ही महीनों में मनी-गेमिंग से संबंधित घटनाओं के कारण 32 लोगों की जान चली गई है. उन्होंने यह भी बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने ‘गेमिंग डिसऑर्डर’ को एक मनोवैज्ञानिक स्थिति के रूप में वर्गीकृत किया है.

आगे क्या होगा

इस बिल के लागू होने के बाद अब देशभर में ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों की गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी। विज्ञापन एजेंसियों और प्रमोशन कंपनियों को भी सतर्क रहना होगा। वहीं बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर को भी यह सुनिश्चित करना होगा कि किसी भी रियल मनी गेम को उनके प्लेटफॉर्म से समर्थन न मिले !

B sudarshan reddy के बारे में जानिए I.N.D.I.A के है उम्मीदवार

जगदीप धनखड़ के इस्तीफा देने के बाद उपराष्ट्रपति पद के चुनाव की सियासी सरगर्मी तेजी से बढ़ गई है नामांकन की आखिरी तारीख 21 अगस्त से पहले सरकार और विपक्ष ने अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है तमिलनाडु से आने वाले और महाराष्ट्र के राज्यपाल CP radhakrishnan को NDA ने उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार 17 अगस्त रविवार को घोषित कर दिया था उसके बाद उसके बाद 19 अगस्त मंगलवार को INDIA गठबंधन ने भी अपना उम्मीदवार सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज B sudarshan reddy को बनाया है

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की X पर पोस्ट

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा

यह उपराष्ट्रपति पद का चुनाव एक वैचारिक लड़ाई है। सभी विपक्षी दलों ने श्री बी. सुदर्शन रेड्डी को भारत के उपराष्ट्रपति पद के लिए अपना संयुक्त उम्मीदवार नामित किया है। श्री बी. सुदर्शन रेड्डी भारत के सबसे प्रतिष्ठित और प्रगतिशील न्यायविदों में से एक हैं। उनका एक लंबा और प्रतिष्ठित कानूनी करियर रहा है, जिसमें आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायाधीश, गुवाहाटी उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में कार्य शामिल है। वे सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय के एक निरंतर और साहसी समर्थक रहे हैं। वह उन मूल्यों को पूरी तरह से प्रतिबिंबित करते हैं, जिन्होंने हमारे देश के स्वतंत्रता आंदोलन को इतनी गहराई से आकार दिया, तथा जिन मूल्यों पर हमारे देश का संविधान और लोकतंत्र आधारित है। इन सभी मूल्यों पर हमला हो रहा है और इसलिए, इस चुनाव को लड़ने का हमारा सामूहिक और दृढ़ संकल्प है।

कौन है B Sudarshan Reddy

  • एक किसान परिवार से आने वाले बी सुदर्शन रेड्डी का जन्म 8 जुलाई 1946 को हुआ था
  • उनका परिवार तेलंगाना के रंगारेड्डी जिले के अकुला मायलाराम गांव के रहने वाले हैं

कानूनी करियर

  • उन्होंने BA / LLb की शिक्षा प्राप्त की है
  • 1971 मे उन्होने उस्मानिया यूनिवर्सिटी, हैदराबाद से एलएलबी (लॉ की डिग्री) की.
  • 27 दिसंबर 1971 को वे आंध्र प्रदेश बार काउंसिल में वकील बन गए फिर रिट और सिविल की प्रैक्टिस शुरू की.
  • 1988 से 1990 तक वे हाई कोर्ट में सरकारी वकील रहे
  • 1990 में 6 महीने के लिए केंद्र सरकार के एक्स्ट्रा स्टैंडिंग काउंसिल भी बने
  • उस्मानिया यूनिवर्सिटी के लिए कानूनी सलाहकार और स्टैंडिंग काउंसिल की भूमिका निभाई.
  • दिसंबर 2005 को वे गुवाहाटी हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस बने 
  • 12 जनवरी 2007 से 8 जुलाई 2011 तक वे सुप्रीम कोर्ट में जज रहे और 2011 में रिटायर हुए।
  • मार्च 2013 में गोवा के पहले लोकायुक्त बने सितंबर में उन्होंने व्यक्तिगत कारणों से इस्तीफा दे दिया था

कब है चुनाव

उपराष्ट्रपति पद के लिए 9 सितंबर को वोटिंग होगी उससे पहले 21 अगस्त तक नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख रखी गई है इसके बाद 21 से 25 तक उम्मीदवार अपने नामांकन वापस भी ले सकते है

MPCA अध्यक्ष के दावेदारी में जूनियर सिंधिया के सामने कोई नहीं.

मध्य प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (MPCA) के आगामी अध्यक्ष पद को लेकर सियासी सरगर्मी के बीच अब तस्वीर लगभग साफ होती नजर आ रही है। एसोसिएशन द्वारा 2 सितंबर को अध्यक्ष पद की घोषणा की जानी है, लेकिन अब तक इस पद के लिए सिर्फ महाआर्यमन सिंधिया / Mahanaaryaman Scindia का नाम सामने आया है। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि यदि अंतिम तारीख तक कोई और नामांकन नहीं आता, तो नियमों के अनुसार,  महाआर्यमन सिंधिया को MPCA का अगला अध्यक्ष घोषित किया जा सकता है।महाआर्यमन सिंधिया, जो कि केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया / jyotiraditya scindia  के पुत्र हैं, इन दिनों राज्य के क्रिकेट परिदृश्य में तेजी से उभरते हुए नजर आ रहे हैं। वे वर्तमान में ग्वालियर डिविजन क्रिकेट एसोसिएशन (DCA) के उपाध्यक्ष पद पर कार्यरत हैं और ग्वालियर मे मध्य प्रदेश प्रीमियर लीग (MPL ) जैसे आयोजनों के जरिए क्रिकेट प्रशंसकों और खिलाड़ियों के बीच लोकप्रियता बटोर रहे हैं।

आयोजन प्रबंधन में अनुभव

महाआर्यमन सिंधिया ने पिछले कुछ वर्षों में ग्वालियर को एक क्रिकेट हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में कई प्रयास किए हैं। उनके नेतृत्व में आयोजित MPL मध्य प्रदेश प्रीमियर लीग में न सिर्फ स्थानीय खिलाड़ियों को मंच मिला, बल्कि कई अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर की हस्तियां भी इन आयोजनों में शरीक हुईं। इनमें पूर्व भारतीय कप्तान कपिल देव, ICC अध्यक्ष जय शाह, और मशहूर रेसलर द ग्रेट खली (दलीप सिंह राणा) शामिल हुए। इन बड़े नामों की उपस्थिति यह दिखाती है कि महाआर्यमन सिंधिया की पकड़ न केवल खेल के प्रशासन में है, बल्कि वे बड़े स्तर के आयोजनों को भी कुशलता से प्रबंधित कर सकते हैं।

अध्यक्ष पद के नियम

MPCA के नियमों के अनुसार यदि अध्यक्ष पद के लिए केवल एक नामांकन ही प्राप्त होता है, तो उस स्थिति में मतदान की आवश्यकता नहीं होती और उम्मीदवार को निर्विरोध चुना जाता है। चूंकि अब तक महाआर्यमन सिंधिया के अलावा किसी और ने नामांकन दाखिल नहीं किया है, ऐसे में यह लगभग तय माना जा रहा है कि वे अगला अध्यक्ष बनेंगे

सिंधिया परिवार की खेल प्रशासन में मौजूदगी

यह पहला मौका नहीं होगा जब सिंधिया परिवार का कोई सदस्य MPCA में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा हो। पूर्व में माधवराव सिंधिया और स्वयं ज्योतिरादित्य सिंधिया भी खेल और क्रिकेट प्रशासन में सक्रिय रहे हैं। महाआर्यमन सिंधिया का यह प्रवेश इस परंपरा को आगे बढ़ाने की दिशा में एक और कदम माना जा रहा है।राजनीति से इतर महाआर्यमन एक युवा नेतृत्व के रूप में स्थापित हो जाएंगे जो क्रिकेट के बुनियादी ढांचे, खिलाड़ियों के विकास और आयोजन गुणवत्ता में सुधार के लिए काम करेगा। ग्वालियर में उनके प्रयासों को लेकर क्रिकेट प्रेमियों के बीच सकारात्मक माहौल है और अब राज्य स्तर पर भी उनसे अपेक्षाएं बढ़ेगी।

मां ने बताया इस दिन के लिए ही रखा था उनका नाम CP radhakrishnan

भाजपा संसदीय बोर्ड ने रविवार 17 अगस्त को अपना उपराष्ट्रपति पद ( Vice president ) की उम्मीदवार की घोषणा की वर्तमान में महाराष्ट्र के राज्यपाल CP Radha Krishnan / सीपी राधा कृष्णन को NDA के लिए इस पद के लिए चुना गया !

आपको बता दें कि इससे पहले उपराष्ट्रपति रहे जगदीप धनखड / jagdeep dhankhar ने स्वास्थ्य की वजह से 21 जुलाई को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था जिस के बाद नए उम्मीदवार चुनने की प्रक्रिया चालू हो गई थी

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने सोशल मीडिया हैंडल X से दी थी जानकारी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने सोशल मीडिया पर लिखते हुए कहा

अपने लम्बे सार्वजनिक जीवन में थिरु सी.पी. राधाकृष्णन जी ने अपने समर्पण, विनम्रता और बुद्धिमत्ता से अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है।विभिन्न पदों पर रहते हुए, उन्होंने हमेशा सामुदायिक सेवा और हाशिए पर पड़े लोगों के सशक्तिकरण पर ध्यान केंद्रित किया है। उन्होंने तमिलनाडु में जमीनी स्तर पर व्यापक कार्य किया है। मुझे खुशी है कि एनडीए परिवार ने उन्हें हमारे गठबंधन के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के रूप में नामित करने का निर्णय लिया है।

उपराष्ट्रपति पद के लिए 9 सितंबर को वोटिंग होगी उससे पहले 21 अगस्त तक नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख रखी गई है इसके बाद 21 से 25 तक उम्मीदवार अपने नामांकन वापस भी ले सकते है

कौन है CP Radha Krishnan

OBC वर्ग से आने वाले सीपी राधा कृष्णन का पूरा नाम चन्द्रपुरम पोनुस्वामी राधाकृष्णन है इसका जन्म 20 अक्टूबर 1957 तमिलनाडु के तिरुप्पुर मे हुआ था
राधा कृष्णन ने वी.ओ. चिदंबरम कॉलेज, कोयम्बटूर से BBA की पढ़ाई की है उनकी खेलों में भी गहरी रुचि है। कॉलेज के समय वो टेबल टेनिस चैंपियन और लंबी दौड़ के रनर थे। उन्हें क्रिकेट और वॉलीबॉल भी पसंद था।

16 साल में राजनीतिक जीवन की शुरुआत

सीपी राधा कृष्णन ने राजनीतिक जीवन की शुरुआत 16 साल में RSS और जनसंघ से की. 70 के दशक में RSS से स्वयंसेवक के तौर पर सक्रिय रहे.जनसंघ में लंबे समय तक कार्यकर्ता के तौर पर काम करने के बाद उनका कार्य को देखते हुए उनका कद बढ़ता गया भारतीय जनसंघ की राज्य कार्यकारी समिति के सदस्य बने उसके बाद 1994 में तमिलनाडु बीजेपी का सचिव नियुक्त किया गया.

  • कोयंबटूर लोकसभा क्षेत्र से दो बार सांसद रहे उस समय उन्होंने संबंधी संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया.
  • 2003 से 2006 तक वह तमिलनाडु भाजपा के अध्यक्ष रहे. इसके अलावा वो केरल बीजेपी के प्रभारी भी रह चुके हैं.
  • फरवरी 2023 से 30 जुलाई 2024 तक झारखंड के राज्यपाल के रूप में कार्य किया.
  • वह 31 जुलाई 2024 से महाराष्ट्र के राज्यपाल हैं

मां ने बताई नाम के पीछे की दिलचस्प कहानी

सीपी राधाकृष्णन की मां जानकी अम्माल ने मीडिया के लोगों से चर्चा करते हुए कहा, “हमने बेटे का नाम सीपी राधाकृष्ण रखा था, इस उम्मीद से कि वो पूर्व राष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णन की तरह बनेगा। भगवान सुंदरमूर्ति ने हमारी सुन ली। भगवान गणेश उसे अपना आशीर्वाद दें। मैं इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी धन्यवाद देना चाहूंगी।”

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन भारत के दूसरे राष्ट्रपति थे, जिन्होंने 1962 से 1967 तक इस पद पर कार्य किया।

भारत का नया आयकर बिल New Income Tax Bill

भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 11 अगस्त को शाम 4:00 बजे एक नया इनकम टैक्स बिल (2025 ) पेश किया इसमें बीजेपी सांसद बैजयंत पांडा की अध्यक्षता वाली संसदीय चयन समिति की ओर से अधिकांश सिफारिशों को शामिल किया गया है । आपको बता दे की इससे पहले भी 13 फरवरी को वह बिल पेश कर चुकी थी जो बीते शुक्रवार को वापस ले लिया गया था

11 अगस्त को विपक्ष हंगामा के बीच 622 पेजों का है NEW Income Tax 2025 बिल वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पेश किया और किसी भी विपक्ष की चर्चा के बिना लोकसभा में पास हो गया नया इनकम टैक्स बिल, 2025 का रिवाइज्ड वर्जन छह दशक पुरानी आयकर अधिनियम 1961 की जगह लेगा इसको एक बार 13 फरवरी को भी लोकसभा में पेश किया गया था लेकिन 31 सदस्य बाली प्रवर समिति की सिफारिशों के बाद सरकार ने वापस ले लिया था

विधेयक पेश करते समय

वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा कि समिति द्वारा कई सुझाव प्राप्त हुए, जिन्हें सही विधायी अर्थ प्रदान करने के लिए इस आयकर बिल में शामिल किया जाना आवश्यक था। वहीं सीतारमण ने कहा कि ड्राफ्टिंग के नेचर, वाक्यांशों के अलाइनमेंट, रिजल्टिंग चेंजेस और क्रॉस रेफरेंसिंग में सुधार किए गए हैं। भ्रम से बचने के लिए पहले वाले बिल को वापस ले लिया गया था। अब नया इनकम टैक्स बिल 2025 लोकसभा में पारित हो गया है 32 सदस्य वाली प्रवर समिति से 285 सुझाव के साथ सरकार ने 32 बड़े बदला भी सम्मिलित किए हैं

विपक्ष के नेता अखिलेश यादव का विरोध

सपा प्रमुख अखिलेश यादव /akhilesh yadav ने बिना बहस के बिल पारित होने पर सवाल उठाए उन्होंने कहा कि

यह भाजपा के काम करने का तरीका है। सदन में बिना किसी चर्चा के इतना बड़ा फैसला ले लिया गया… उनकी विदेश नीति देखिए, टैरिफ पर टैरिफ, हमारा पूरा कारोबार चीन पर निर्भर है, तो वे किस तरह का संशोधन कर रहे हैं? कोई सोच भी नहीं सकता था कि 20,000 प्राथमिक स्कूल बंद हो जाएंगे। अगर गरीब बच्चे पढ़ नहीं पा रहे हैं, तो कोई भी आयकर बिल आपको खुशी नहीं दे सकता