अमिताभ बच्चन ने बताया ‘ राजनीति से क्यों किया किनारा

राजनीति से अभिनेताओं का जुड़ाव पहले से हि रहा हैं वहीं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री हेमन्ती लंदन बहुगुणा को इलाहाबाद से लोकसभा चुनाव हार चुके अभिनेता अमिताभ बच्चन ने भी राजनीति से दूरियां बनाने पर अपनी चुप्पी थोड़ी दरअसल कौन बनेगा करोड़पति 17′ दर्शकों के बीच काफी चर्चा बनाता आ रहा है अमिताभ बच्चन इसको कई वर्षों से होस्ट करते है जिसमें बच्चन हंसी मजाक तो करते ही हैं उसके साथ वह अपनी पर्सनल लाइफ के कई ऐसे किस्से शेयर करते हैं, जो फैन्स को बेहद पसंद आता है. इस बार अमिताभ ने शो में कंटेस्टेंट्स को बताया कि आखिरकार उन्होंने राजनीति क्यों छोड़ी

क्यों छोड़ी राजनीति?

अमिताभ ने बताया कि राजनीति एक बहुत मुश्किल टास्क है. अमिताभ ने कहा- मैंने राजनीति एक भावनात्मक स्थिति में छोड़ी. मेरा जन्म इलाहाबाद (प्रयागराज) में हुआ था. वहां के लोग मुझे बहुत प्यार करते हैं. मुझे वोट मिले, मैंने चुनाव जीता. पर जब मैंने वहां कुछ दिन गुजारे तो मुझे लगा किया कि ये एक मुश्किल कार्य है. हमें इस पक्ष को भी देखना चाहिए. उस पक्ष को भी देखना चाहिए. एक तरफ की सुननी चाहिए. ऐसा कार्य तो मुझे बहुत मुश्किल लगा. पर इस राजनीति मैं रहकर मैं बहुत कुछ सीखा और मैंने जाना की भारत में अगर गांव वाले क्षेत्रों को हम देखें तो वहां की वास्तविक जिंदगी में स्थिति अभी भी बहुत खराब है. मेरे लिए वो दो साल बहुत कीमती रहे. मुझे पता लगा कि लोग आखिर रह कैसे रहे हैं. वो क्या करते हैं, कैसे करते हैं. वो आपको इतनी इज्जत देते हैं. जब भी कोई चुनाव में लड़ने के लिए खड़ा होता है तो सभी साथ देते हैं. वो अपनों की तरह से इज्जत करते हैं.

किस पार्टी से लड़ा था चुनाव ?

अमिताभ बच्चन ने साल 1984 में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की सदस्यता ले ली थी वह राजीव गांधी की बहुत बढ़िया दोस्त थे इंदिरा गांधी की हत्या के बाद लोकसभा का चुनाव था जहां कांग्रेस के साथ सहानुभूति तो थी और नाम भी बहुत बड़ा था कांग्रेस में अमिताभ बच्चन को इलाहाबाद से चुनाव लड़ाया जहां से उनके विपक्ष में उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और देश में केंद्रीय मंत्री रह चुके हेमन्ती लंदन बहुगुणा खड़े हुए थे हेमन्ती लंदन बहुगुणा पहले कांग्रेस के ही सदस्य हुआ करते थे और वह कई पदों पर भी रहे लेकिन किसी विवादित वजह से उन्होंने कांग्रेस से किनारा कर लिया उसे समय अमिताभ बच्चन लोकप्रियता फिल्म जगत के साथ-साथ बिहार ज्यादा थी वही वह चुनाव के लिए इलाहाबाद की गलियों में घूमते नजर आते थे अमिताभ बच्चन ने हेमन्ती लंदन बहुगुणा को एक लाख 87 हजार 795 वोटों से हराया था

इंडोनेशिया में गूंजा ‘ओम शांति ओम’ – सबसे बड़े मुस्लिम देश के राष्ट्रपति का अनोखा अंदाज़

मंगलवार को एक दिलचस्प वाकया हुआ, जब संयुक्त राष्ट्र महासभा में सबसे बड़े मुस्लिम देश के राष्ट्रपति ने हिंदू धर्म के ओम शब्द का उच्चारण किया इस पल ने हर किसी का ध्यान खींच लिया। इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रोबोवो सुबिआंतो ने एक भाषण को संबोधित किया संबोधित करते समय उन्होंने समापन ओम शांति ओम के साथ किया। राष्ट्रपति प्रोबोवो ने महासभा में दुनिया के नेताओं से एक साथ मिलकर काम करने की अपील भी की उन्होंने कहा कि आज की चुनौतियाँ सिर्फ किसी एक देश या धर्म की समस्या नहीं हैं, बल्कि मानवता के सम्मुख खड़ी चुनौतियाँ हैं जिन्हें मिलकर सुलझाना होगा फिर ‘ओम स्वास्तिअस्तु’ भी कहा जिसका अर्थ है आप धन्य और सुरक्षित रहें। यह इंडोनेशिया के हिंदू बहुल बाली द्वीप में बोला जाता है। सुबिआंतो ने अपनी स्पीच ओम शांति शांति ओम के साथ ही नमो बुद्धाय और यहूदी अभिवादन शालोम भी कहा। इस दौरान इंडोनेशियाई राष्ट्रपति ने इजरायल के समर्थन में बड़ा बयान दिया वहीं इसी पल पर हर किसी का ध्यान आकर्षित रहा

एक और बड़ा घोषणा-प्रस्ताव भी उन्होंने रखा: उन्होंने कहा कि गाजा में शांति बनाए रखने के लिए इंडोनेशिया अपनी सेनाएँ भेजने के लिए तैयार है — यदि संयुक्त राष्ट्र या महासभा इस आवश्यकता को तय करती है तो उन्होंने कहा कि देश 20,000 से अधिक जवानों को शांति स्थापना के लिए तैनात करने की पेशकश करने को तैयार है और न सिर्फ गाजा बल्कि यूक्रेन, सूडान या लीबिया जैसी बाज़ारों में भी शांति सैनिक भेजने का विचार रखा जा सकता है

इजरायल का समर्थन

संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए उन्होंने इसराइल के समर्थन में भी बयान दिया
सुबिआंतो ने कहा कि ‘हमें इजरायल को भी मान्यता देनी चाहिए, उसका सम्मान करना चाहिए और उसकी सुरक्षा की गारंटी भी देनी चाहिए। तभी हम वास्तविक शांति हासिल कर सकते हैं।’

यह भी कहा कि इंडोनेशिया उसी दिन इजरायल को मान्यता देगा जिस दिन यहूदी देश फिलिस्तीन को मान्यता देगा। सुबियांतो ने कहा कि इंडोनेशिया ऐसी शांति चाहता है जो दिखाए की ‘ताकत से सब ठीक नहीं हो सकता।’

उन्होंने जोर देकर बोला, ‘इंडोनेशिया एक बार फिर फिलिस्तीन समस्या के द्वि-राष्ट्र समाधान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराता है। केवल इसी से शांति स्थापित होगी। हमें फिलिस्तीन के लिए देश का दर्जा सुनिश्चित करना होगा और हम इजरायल की सुरक्षा की सभी गारंटी का समर्थन करेंगे

इसके साथ ही उन देशों की तारीफ की, जिन्होंने हाल ही में फिलिस्तीन को मान्यता दी है। सुबिआंतो ने इसे ‘इतिहास के सही पक्ष में कदम’ बताया।

2025 दिल्ली यूनिवर्सिटी के नए प्रेजिडेंट कौन है आर्यन मान,  अभिनेताओं ने किया था समर्थन और प्रचार

दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन (DUSU) चुनाव का परिणाम सामने आ चुका है। हरियाणा के बहादुरगढ़ के रहने वाले आर्यन मान ने शानदार जीत दर्ज करते हुए दिल्ली यूनिवर्सिटी के नए प्रेजिडेंट बनने है। वह अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के उम्मीदवार थे और उन्होंने कांग्रेस की छात्र इकाई NSUI की प्रत्याशी जोशलिन नंदिता चौधरी को 16,196 वोटों से हराया है

  • आर्यन को 28,841 वोट और जोशलिन को 12645 वोट मिले।

कौन है आर्यन मान ?

शिक्षा का सफर

आर्यन मान की शुरुआती पढ़ाई बहादुरगढ़ से शुरू हुई। उन्होंने पांचवीं तक की पढ़ाई सेंट थॉमस स्कूल से की। इसके बाद उनका दाखिला दिल्ली के वसंत कुंज स्थित जीडी गोयनका स्कूल में हुआ, जहां से उन्होंने 12वीं पास की।
उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने हंस राज कॉलेज से बीकॉम किया। पढ़ाई के साथ-साथ छात्र राजनीति में सक्रिय रहते हुए उन्होंने अपनी पहचान बनाई। इस समय वह दिल्ली यूनिवर्सिटी से एमए (लाइब्रेरी साइंस) की पढ़ाई कर रहे हैं।

कारोबार और राजनीति से जुड़ा परिवार

आर्यन मान ऐसे परिवार से आते हैं, जिसने हरियाणा में कारोबार और राजनीति दोनों क्षेत्रों में मजबूत पहचान बनाई है। उनका परिवार शराब और रियल एस्टेट कारोबार से जुड़ा हुआ है। देशभर में मशहूर लिकर ब्रांड रॉयल ग्रीन इन्हीं के परिवार से जुड़ा है।

उनके पिता सिकंदर मान झज्जर जिले के बेरी क्षेत्र में स्थित एडीएस स्पिरिट शराब फैक्ट्री के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर हैं। यह सिर्फ कारोबारी पहचान तक सीमित नहीं है, बल्कि राजनीतिक दखल भी इस परिवार की खासियत रही है। पिता दो बार अपने गांव लोवा कलां के सरपंच रह चुके हैं।

वहीं, उनके ताऊ दलबीर मान क्षेत्र के बड़े व्यवसायी माने जाते हैं और पूरे बिजनेस एंपायर की नींव उन्होंने ही रखी थी।आर्यन के दादा स्वर्गीय श्रीचंद मान लोवा सत्रह खाप के प्रधान रहे हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि परिवार का असर सिर्फ कारोबार तक ही नहीं, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में भी गहराई से रहा है।

अभिनेताओं और धार्मिक कार्यक्रमों से जुड़ाव

मान परिवार लंबे समय से सामाजिक और धार्मिक गतिविधियों में सक्रिय रहा है। हर साल लोवा कलां गांव में दादा श्रीचंद मान की बरसी पर भव्य आयोजन होता है। इस कार्यक्रम में फिल्म जगत की हस्तियां, राजनीतिक नेता और सामाजिक कार्यकर्ता बड़ी संख्या में शामिल होते हैं।

इसी तरह चुनाव प्रचार के दौरान भी आर्यन को बड़े स्तर का समर्थन मिला। बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता संजय दत्त, रणदीप हुड्डा और भोजपुरी स्टार रवि किशन ने उनके समर्थन में अपील की। वहीं हरियाणवी सिंगर मासूम शर्मा खुद प्रचार में सक्रिय नजर आए। इससे यह साफ झलकता है कि आर्यन की कैंपेनिंग केवल छात्र राजनीति तक सीमित नहीं रही, बल्कि फिल्मी दुनिया से लेकर समाज के अलग-अलग वर्गों तक उसकी गूंज रही।

हरियाणा और DUSU का पुराना रिश्ता

दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्र संघ चुनाव और हरियाणा का रिश्ता नया नहीं है दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता हरियाणा के जींद जिले से है। वह 1996 में DUSU की प्रेजिडेंट चुनी गई थीं। इसके अलावा अब तक पांच और अध्यक्ष ऐसे रहे हैं, जिनका संबंध हरियाणा से रहा है।

1954 में जब पहली बार DUSU का चुनाव हुआ था, तब फरीदाबाद के गजराज बहादुर नागर पहले प्रेजिडेंट बने थे। आगे चलकर उन्होंने सक्रिय राजनीति में कदम रखा और 1977 में मेवला महाराजपुर से विधायक बनकर खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री भी बने।

स्मृति ईरानी बोलीं- राजनीति में आने से मुझे हुआ है नुकसान कभी राहुल गांधी को हारा चुकी है चुनाव

अमेठी से 2019 मैं राहुल गांधी को लोकसभा चुनाव हारा ने वाली मोदी केबिनेट मे मंत्री रह चुकीं अभिनेत्री स्मृति ईरानी अपने जीवन में हुए नुकसान का कारण राजनीति को बताएं जब की लंबे समय तक राजनीति में सक्रिय रहने के बाद अब वह अपने आइकॉनिक शो ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ के दूसरे सीजन के साथ छोटे पर्दे पर वापसी कर रही हैं। इस शो में स्मृति फिर से ‘तुलसी’ के किरदार में नजर आएंगी।

दरअसल सोहा अली खान के शो ‘ All About Her ’ में स्मृति ईरानी ने अपने करियर और निजी संघर्षों पर खुलकर बातचीत करते हुए उन्होंने साफ कहा कि राजनीति में कदम रखने से उनके करियर को  नुकसान हुआ। स्मृति ने कहा—
“लोग मानते हैं कि कोई भी एक्टर अपने करियर के अंत में राजनीति में आता है, लेकिन मैंने तो शुरुआत में ही राजनीति का रास्ता चुन लिया था। यहां मुझे दोगुनी मेहनत करनी पड़ी।”

टीवी से राजनीति तक का सफर

साल 2000 में ‘तुलसी’ के किरदार से स्मृति ईरानी घर-घर में पहचान बनाने लगीं। यह शो लगभग 8 साल तक चला और उन्हें स्टारडम की ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया। इसके बाद उन्होंने प्रोडक्शन में भी हाथ आजमाया और ‘थोड़ी सी जमीन थोड़ा सा आसमान’, ‘विरुध’ और ‘मेरे अपने’ जैसे सीरियल्स को प्रोड्यूस किया।टीवी पर सफलता हासिल करने के बाद स्मृति ईरानी ने राजनीति की राह पकड़ी। भारतीय जनता पार्टी से जुड़कर उन्होंने सक्रिय राजनीति में अपनी पहचान बनाई। उन्हें मानव संसाधन विकास मंत्री, कपड़ा मंत्री, सूचना और प्रसारण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), महिला एवं बाल विकास मंत्रालय और अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय जैसे अहम पदों की जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला।

पिता से लिया था लोन

स्मृति ईरानी ने अपने शुरुआती दिनों का किस्सा भी बताया। उन्होंने बताया कि मिस इंडिया प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के लिए उन्हें एक लाख रुपये की जरूरत थी। इसके लिए उन्होंने अपने पिता से लोन लिया। लेकिन पिता ने शर्त रखी कि अगर एक साल के भीतर वह पैसे नहीं लौटा पाईं तो उनकी शादी पिता की पसंद के लड़के से कर दी जाएगी।

नीलेश मिश्रा के शो ‘द स्लो’ में स्मृति पहले ही यह खुलासा कर चुकी हैं कि लोन चुकाने के लिए उन्हें काफी संघर्ष करना पड़ा। ब्यूटी पेजेंट से मिले गिफ्ट्स बेचकर उन्होंने पिता को करीब 60 हजार रुपये लौटा दिए, लेकिन बाकी रकम जुटाने के लिए उन्हें मैकडॉनल्ड्स में नौकरी करनी पड़ी। तीन से चार महीने तक वहां क्लीनर का काम करते हुए वह हफ्ते में छह दिन काम करतीं और छुट्टी के दिन ऑडिशन देतीं। इन्हीं ऑडिशन के दौरान उन्हें एकता कपूर का सीरियल ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ मिल गया।

25 साल बाद फिर से ‘तुलसी’

अब 25 साल बाद स्मृति ईरानी फिर से अपने पुराने किरदार ‘तुलसी’ के रूप में दर्शकों के सामने आ रही हैं। यह शो उनके लिए केवल करियर का टर्निंग प्वाइंट नहीं था बल्कि संघर्ष से सफलता तक की उनकी यात्रा का प्रतीक भी है।

प्रधानमंत्री मोदी और इटली की पीएम मेलोनी की AI वीडियो सोशल मीडिया पर डालने वाला युवक गिरफ्तार

अगर आप सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते हैं और इंस्टाग्राम पर मनोरंजन के लिए रील देखने के शौकीन है तो आप की नजर एक ना एक बार उस AI से बनी हुई वीडियो पर जरूर पडी होगी जिस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी साथ नजर आते हैं.

मामला उसकी फर्जी वीडियो से जुड़ा हुआ है दरअसल रायबरेली जिले के बछरावां थाना क्षेत्र के बन्नावा गांव के रहने वाले एक युवक को गुरुवार को गिरफ्तार कर लिया गया। उस पर आरोप है कि उसने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की एक फर्जी वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड की थी। इस वीडियो को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से तैयार किया गया था। पुलिस के अनुसार, आरोपी का नाम दुर्गेश कुमार है और उसकी गतिविधियों पर बीते कुछ दिनों से निगरानी रखी जा रही थी .

AI टूल की थी जानकारी

वह फ्रीलांसर के तौर पर डिजिटल मीडिया से जुड़ा हुआ था और उसे कुछ हद तक वीडियो एडिटिंग व AI टूल्स आता है। उसने इंटरनेट पर उपलब्ध AI तकनीक की मदद से यह वीडियो तैयार किया और फिर अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर अपलोड कर दिया। वीडियो के वायरल होते ही पुलिस ने कार्रवाई शुरू की और उसे ढूंढ निकाला

पुलिस करेगी सख्त कार्रवाई

वहीं पुलिस प्रशासन ने कहा है कि ऐसे मामलों में सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति इस तरह की हरकत करने से पहले सौ बार सोचे।”

NDA ने जीता चुनाव सीपी राधा कृष्णन बने भारत के 15वे उपराष्ट्रपति

NDA के प्रत्याशी सी.पी. राधा कृष्णन ने भारत के 15वें उपराष्ट्रपति के रूप में चुनाव जीत लिया है. उन्होंने ने 152 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की यह पद जगदीश धनखड़ के इस्तीफे के बाद संभाला है। 9 सितम्बर को हुए मतदान के बाद यह परिणाम घोषित किया गया है

जहाँ INDIA कैंडिडेट सुदर्शन रेड्डी को प्रथम वरीयता के 300 वोट मिले। वही राधाकृष्णन ने 152 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की।कांग्रेस ने INDIA के 315 सांसदों के मतदान का दावा किया था, लेकिन जिससे INDIA गठबंधन के प्रत्याशी को 15 वोट कम मिले। BRS और BJD ने चुनाव में भाग नहीं लिया, जबकि राज्यसभा में बीआरएस के 4 और BJD के 7 सांसद हैं। और लोकसभा में इकलौते सांसद वाले शिरोमणि अकाली दल ने भी पंजाब में बाढ़ के चलते वोट डालने से इनकार कर दिया।

अब उपराष्ट्रपति के रूप में सी.पी. राधा कृष्णन राज्यसभा के सभापति का दायित्व भी संभालेंगे

निजी जीवन और शिक्षा

चंद्रपुरम पोनुस्वामी राधा कृष्णन का जन्म 20 अक्टूबर 1957 को तमिलनाडु के तिरुप्पुर जिले में हुआ था। उन्होंने वी.ओ. चिदंबरम कॉलेज, कोयंबटूर से बीबीए की डिग्री प्राप्त की। पढ़ाई के साथ-साथ उन्हें खेलों में भी गहरी रुचि रही है। कॉलेज के दिनों में वह टेबल टेनिस चैंपियन और लंबी दूरी के धावक के रूप में चर्चित रहे। क्रिकेट और वॉलीबॉल भी उनके प्रिय खेलों में शामिल रहे हैं।

राजनीतिक जीवन की शुरुआत

राधा कृष्णन ने महज 16 वर्ष की आयु में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और जनसंघ के साथ सार्वजनिक जीवन में कदम रखा। 1970 के दशक में वे एक सक्रिय स्वयंसेवक के रूप में संघ से जुड़े रहे। उनकी मेहनत और समर्पण को देखते हुए उन्हें जल्दी ही संगठन में अहम जिम्मेदारियां सौंपी गईं।

राजनीतिक संगठन में उनकी पकड़ मजबूत होती गई और वे भारतीय जनसंघ की राज्य कार्यकारिणी समिति के सदस्य बने। इसके बाद 1994 में उन्हें तमिलनाडु बीजेपी का सचिव नियुक्त किया गया, जिससे उनका राजनीतिक कद और बढ़ गया। और वह 2003 से 2006 तक तमिलनाडु भाजपा के अध्यक्ष का पद संभाला।

राज्यपाल के रूप में कार्यकाल

राजनीति और संगठन के अलावा, उन्हें प्रशासनिक कार्यों का भी अच्छा अनुभव रहा है। फरवरी 2023 से जुलाई 2024 तक वे झारखंड के राज्यपाल रहे। इसके बाद 31 जुलाई 2024 को उन्हें महाराष्ट्र का राज्यपाल नियुक्त किया गया। हालांकि, उपराष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी के चलते उन्होंने राज्यपाल पद से त्यागपत्र दे दिया।

और अब वह भारत के 15वे उपराष्ट्रपति बन चुके हैं जहां उन्होंने NDA के प्रत्याशी के तौर पर जीत दर्ज कराई है

जब धमकी भरे अंदाज में बोले अजीत पवार

महाराष्ट्र के डिप्टी CM और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के अध्यक्ष अजित पवार का महिला IPS अधिकारी अंजना कृष्णा से बहस का वीडियो बहुत तेजी से वायरल हो रहा है । इसमें Ajit Pawar महिला अधिकारी को फटकारते नजर आ रहे हैं। दरअसल घटना 31 अगस्त को सोलापुर जिले के कुर्दु गांव की है, जहां IPS अंजना कृष्णा मुरम का अवैध खनन रोकने पहुंची थीं।

जिसके बाद वहां उपस्थित एक व्यक्ति ने फोन IPS अधिकारी को देते हुए कहा कि बात कीजिए जब उन्होंने बात की वहां से बोलने वाले व्यक्ति ने कहा – मैं डिप्टी चीफ मिनिस्टर वहां बनाया गया वीडियो अब तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें नजर आ रहा है कि सिविल ड्रेस में IPS अंजना कृष्णा हाथ में मोबाइल लिए खड़ी हुई हैं। उनके आस-पास कुछ लोग हैं। IPS की कॉल पर अजित पवार से बात चल रही है। दावा है कि अजित पवार IPS को कार्रवाई रोकने का कह रहे हैं।

अजीत पवार ने X पर कहा

हालांकि वीडियो सामने आने के बाद अजित पवार ने सोशल मीडिया X पर लिखा- सोलापुर में पुलिस अधिकारियों के साथ मेरी बातचीत से जुड़े कुछ वीडियोज सामने आए हैं। मैं साफ कहना चाहता हूं कि मेरा इरादा कानून में दखल देने का नहीं था, बल्कि यह सुनिश्चित करना था कि जमीनी स्तर पर स्थिति शांत रहे। मैं पुलिस फोर्स और उसके अधिकारियों, जिनमें महिला अधिकारी भी शामिल हैं उनका बहुत सम्मान करता हूं। रेत खनन या अन्य अवैध गतिविधि के खिलाफ कानून के अनुसार सख्ती से निपटा जाना चाहिए।

वीडियो में बातचीतअजित पवार और IPS अंजना कृष्णा के बीच हुई बातचीत

अजित पवारः उन्होंने रिक्वेस्ट की ना।

आईपीएस कृष्णाः हां, तो हमको उनको मदद करना ही है।

अजित पवारः सुनो… सुनो मैं डिप्टी चीफ मिनिस्टर अजित पवार बोल रहा हूं। मैं आपको आदेश देता हूं कि ये रुकवाओ, तहसीलदार के पास जाओ, उनको बोले कि अजित पवार ने यह सब रुकवाने के लिए कहा, क्योंकि अभी मुंबई का माहौल खराब हुआ है, उसे प्राथमिकता देना है। मेरा नंबर दो उनको।

आईपीएस कृष्णाः आप एक काम कीजिए, मेरे फोन पर डायरेक्ट कॉल कीजिए।

अजित पवारः एक मिनट… मैं तेरे पर एक्शन लूंगा। आप मुझे डॉयरेक्टर कॉल करने के लिए कहती हो।

आईपीएस कृष्णाः मुझे कैसे पता ये आपका नंबर है। जो आप बोल रहे हैं मैं समझ रही हूं, सर।

अजित पवारः तुझे मुझे देखना है ना, तेरा वॉट्सएप नंबर देता हूं, मुझे कॉल करो, मैं यहां से बोल देता हूं।

आईपीएस कृष्णाः ठीक है सर।

अजित पवारः मेरा चेहरा तो आपको समझ में आएगा ना, इतना आपको डैरिंग हुआ है क्या।

आईपीएस कृष्णाः मुझे कुछ पता नहीं है सर, मैं समझ रही हूं।

अजित पवारः आपका नंबर दे दो, मैं डायरेक्ट कॉल करता हूं।

IPS कृष्णा अपना मोबाइल नंबर अजित पवार को देती हैं… इसके बाद अजित पवार IPS कृष्णा की वीडियो कॉल पर बातचीत होती है…

तीन पेंशन “जानिए कैसे जगदीश धनखड़ को मिल रही है VIP रिटायरमेंट जिंदगी”

जगदीश धड़कन देश के 14वें उपराष्ट्रपति के रूप में 11 अगस्त 2022 को शपथ ली थी जिनका कार्यकाल 5 साल का था लेकिन उन्होंने 3 वर्ष में ही अपने स्वास्थ्य का हवाला देकर पद से 21 जुलाई को इस्तीफा दे दिया था जिसकी बाद उन्होंने सरकार से मिलने वाली पेंशन की मांग की थी उन्हें  (पूर्व उपराष्ट्रपति, पूर्व सांसद, पूर्व विधायक) की पेंशन मिलेगी जो हर महीने करीब 2.73 लाख रुपए होंगे

दरअसल उन्होंने पहले 1993 से 1998 तक किशनगढ़ सीट से कांग्रेस के विधायक रहे थे पूर्व विधायक के नाते मिलने वाली पेंशन के लिए उन्होंने राजस्थान विधानसभा सचिवालय में फिर से आवेदन किया था उसके बाद आवेदन पर प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा देने के बाद से उनकी पेंशन शुरू होगी उन्हें जुलाई 2019 तक पेंशन मिल रही थी। लेकिन जुलाई 2019 में पश्चिम बंगाल के राज्यपाल बनने के बाद पेंशन बंद हो गई थी आई समझते हैं बिस्तर में

सरकारी पद पर पेंशन होती है बंद

दरअसल जब भी कोई पूर्व विधायक अगर किसी भी सरकारी पद पर मनोनीत हो जाते हैं या देश प्रदेश का मंत्री बन जाता हैं तो विधानसभा सचिवालय को इसकी तय फॉर्मेट में सूचना दी जाती है। इसके बाद पेंशन बंद हो जाती है ! सरकारी पद से कार्यकाल पूरा होने के बाद विधानसभा सचिवालय को तय फॉर्मेट में आवेदन कर सूचना देनी होती है। इसके बाद पेंशन फिर शुरू हो जाती है !

विधायक की सैलरी

राजस्थान प्रदेश अब विधायकों को मूल वेतन लगभग 1 लाख 47 हजार रुपए मिल रहे हैं जिसमें

  • वेतन के रूप में 40 हजार
  • निर्वाचन क्षेत्र भत्ता 70 हजार
  • सहायक कर्मचारी भत्ता 30 हजार
  • टेलीफोन भत्ता 2500 रुपए
  • कमेटियों में आने का भत्ता 2000
  • राज्य से बाहर बैठक भत्ता 2500 रुपए मिलता है.

पूर्व विधायक की पेंशन

दरअसल पूर्व विधायक को 35 हजार रुपए महीना पेंशन मिलती है पर पेंशन हर टर्म के हिसाब से बढ़ती रहती है। पांच साल के बाद जो जितनी बार विधायक रहा है, उसे 5 साल बाद के हर टर्म में प्रतिमाह 1600 रुपए जोड़ते हुए अतिरिक्त पेंशन मिलती है।

  • जिसे एक बार विधायक: ₹35,000
  • दो बार विधायक: ₹42,000
  • तीन बार: ₹50,000
  • 70 साल से ऊपर होने पर: 20% अतिरिक्त पेंशन का इजाफा होता है

धनखड़ एक बार विधायक रहे हैं लेकिन उनकी उम्र 75 साल है। ऐसे में उन्हें 20 प्रतिशत ज्यादा पेंशन मिलेगी। उन्हें 35 हजार प्रतिमाह में 20 फीसदी जोड़कर पेंशन

हर महीने करीब 2.73 लाख मिलेंगे

धनखड़ को (पूर्व उपराष्ट्रपति, पूर्व सांसद, पूर्व विधायक) की पेंशन मिलेगी जो लगभग 2.73 लाख रुपए हो जाएगी

  • पूर्व उपराष्ट्रपति के तौर पर करीब 2 लाख रुपए महीने की पेंशन मिलेगी
  • पूर्व विधायक के तौर पर 42 हजार रुपए
  • पूर्व सांसद के तौर पर 31 हजार रुपए हर महीने की पेंशन मिलेगी

धनखड़ भले ही सक्रिय राजनीति से अलग हो गए हों, लेकिन उन्हें अब तीन अलग-अलग पदों के हिसाब से ₹2.73 लाख प्रतिमाह की पेंशन मिलेगी। यह मामला यह भी दिखाता है कि देश की राजनीति में एक बार पद मिल जाने के बाद उसके प्रभाव लंबे समय तक चलते हैं

सूरत में युवक बना मध्य प्रदेश का ‘डिप्टी सीएम’, रेलवे पुलिस ने पकड़ा फर्जीवाड़ा

नाम – रणजीत यादव
उम्र – 21 साल
निवासी – मध्य प्रदेश जिला सतना

गुजरात के सूरत से एक अजीबो-गरीब मामला सामने आया है जिसने मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला तक को हैरान कर दिया। मामला सूरत रेलवे स्टेशन का है, जहां मध्य प्रदेश के सतना जिले का रहने वाला 21 वर्षीय युवक रणजीत यादव फर्जीवाड़ा करते हुए पकड़ा गया। दरअसल, रणजीत यादव सूरत में मजदूरी करता है। 29 अगस्त को सूरत रेलवे स्टेशन पर उसे बिना टिकट यात्रा करते हुए पकड़ लिया। कुछ देर पूछताछ के बाद उसे समझाइश देकर छोड़ भी दिया गया

फिर शुरू किया ड्रामा

लेकिन इसके बाद जो हुआ, उसने RPF अधिकारियों को चौंका दिया।
जैसे ही वह स्टेशन से निकला, रणजीत ने मुंबई कंट्रोल रूम पर फोन लगाकर RPF ड्यूटी ऑफिसर का नंबर मांगा। कंट्रोल रूम ने उसे उपनिरीक्षक कुलदीप सिंह का नंबर दिया। इसके बाद रणजीत ने सीधे कुलदीप सिंह को फोन किया और खुद को मध्य प्रदेश का डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला बताते हुए कहा—
“आपने मेरे परिचित रणजीत यादव को पकड़ा है, उसे तुरंत छोड़ दीजिए। मेरे आदमी को रोकने की हिम्मत कैसे की?” यह सुनकर कुलदीप सिंह आचार्य में हो गए की एक मामूली व्यक्ति के लिए उपमुख्यमंत्री फोन कैसे लगा सकता है

खुला युवक का फर्जीवाड़ा

फोन पर डिप्टी सीएम की तरह रौब झाड़ रहे रणजीत यादव की बात सुनकर उपनिरीक्षक को शक हुआ। उन्होंने तुरंत छानबीन शुरू की तो पता चला कि यह वही युवक है जिसे टिकट न होने पर पकड़ा गया था। जिसके बाद यह मामला GRP को दे दिया गया जहां उन्होंने इस पूरे मामले की जांच की और रणजीत को दोबारा बुलाकर शक्ति से पूछताछ की।
पकड़े जाने पर रणजीत ने कबूल किया कि उसने ही खुद को डिप्टी सीएम बनकर फोन किया था। यही नहीं, उसके मोबाइल से चौंकाने वाली जानकारी मिली। जहां उसके मोबाइल में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री और मंत्रियों के साथ-साथ कई बड़े अधिकारियों के नंबर सेव थे यहां तक कि उसकी व्हाट्सएप प्रोफाइल पर उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला की तस्वीर लगी हुई थी।

कौन है राजेंद्र शुक्ला

गौरतलब है कि जिस नाम का फर्जी इस्तेमाल रणजीत कर रहा था, वह वास्तव में मध्य प्रदेश भाजपा के कद्दावर नेता हैं। राजेंद्र शुक्ला रीवा विधानसभा से विधायक हैं और चार बार मध्य प्रदेश के मंत्री रह चुके हैं। वर्तमान में वे मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पद पर कार्यरत हैं। बघेलखंड क्षेत्र, जिसमें रीवा और सतना दोनों जिले आते हैं, जिसमें उनकी गहरी पकड़ और लोकप्रियता मानी जाती है।

एक मामूली टिकट चेकिंग से शुरू हुआ मामला फर्जीवाड़े तक जा पहुंचा। अब रणजीत यादव जेल की सलाखों के पीछे है, जबकि RPF और GRP ने इस पूरे प्रकरण को लेकर उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट भेज दी है।

ज्योतिरादित्य सिंधिया को लेकर दिग्विजय और कमलनाथ में टकरार

24 अगस्त को मध्य प्रदेश 2020 में ज्योतिरादित्य सिंधिया द्वारा गिरा दी गई कांग्रेस की सरकार को लेकर 5 साल बाद आरोप प्रत्यारोप लगना शुरू हो गए हैं ! मध्य प्रदेश के दोनों कांग्रेस मुख्यमंत्री रहे दिग्विजय सिंह और कमलनाथ के राजनीतिक टकराव अब आमने-सामने आ गए है

आपको बता दे कि नवंबर-दिसंबर 2018 में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने लंबे अंतराल के बाद सत्ता में वापसी की थी। चुनावी नतीजों ने कांग्रेस को मजबूत स्थिति में पहुंचाया और पार्टी ने बहुमत हासिल कर लिया। तब दिल्ली से लेकर भोपाल तक चर्चा थी कि आखिर मुख्यमंत्री कौन बनेगा—ज्योतिरादित्य सिंधिया या कमलनाथ। अंततः पार्टी हाईकमान ने कमलनाथ पर भरोसा जताया और उन्हें मुख्यमंत्री बना दिया।

उस समय गुना से कॉंग्रेस के सांसद रहे ज्योतिरादित्य सिंधिया को पार्टी और सरकार में पर्याप्त महत्व न मिलने की शिकायत रही। वे खुद को और उनके द्वारा लिए गए जनता के वोटो उपेक्षित महसूस कर रहे थे । यह नाराज़गी समय के साथ बढ़ती गई और आखिरकार 2020 में एक बड़े राजनीतिक भूचाल में बदल गई।

मार्च 2020 में सिंधिया ने बड़ा फैसला लिया। उन्होंने अपने 22 समर्थक विधायकों के साथ कांग्रेस से इस्तीफा देकर बीजेपी का दामन थाम लिया। यह कदम मध्य प्रदेश की राजनीति के लिए ऐतिहासिक मोड़ साबित हुआ। कमलनाथ की सरकार अल्पमत में आ गई और उन्हें मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा। इसके बाद बीजेपी ने शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में सत्ता संभाली।

लेकिन इतना सब होने के बाद 5 साल तक सिंधिया, दिग्विजय या कमलनाथ कुछ नहीं बोल पर कुछ समय पहले एक न्यूज़ चैनल में दिग्विजय सिंह से मध्य प्रदेश में गिरी 2020 की सरकार को लेकर सवाल पूछा गया जहां उन्होंने उसका उत्तर दिया जिस के बाद कमलनाथ और दिग्विजय सिंह की राजनीतिक मनमुटाव सार्वजनिक हो गए

क्या बोले दिग्विजय

पांच साल बाद बंद कमरे वाली यह बात अब सार्वजनिक हुई दिग्विजय सिंह ने कमलनाथ को जिम्मेदार ठहराया

उन्होंने ने कहा कि एक बड़े उद्योगपति हैं, जिनके कमल नाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया से अच्छे संबंध हैं। मैं उनके पास जाकर कहा कि इन दोनों की लड़ाई में हमारी सरकार गिर जाएगी। आप दोनों को संभालिए फिर उद्योगपति के घर डिनर पर कमल नाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया मिले। मैं भी वहां मौजूद था। कोशिश की गई कि मामला निपट जाए। वहीं, जिन मुद्दों पर वहां बात हुई, उसका पालन नहीं हुआ। मेरे सतत प्रयासों के बाद भी पालन नहीं हुआ। दिग्विजय सिंह ने कहा कि वे बातें छोटी-मोटी थीं, ग्वालियर-चंबल संभाग में हम जैसा कहेंगे, वैसा कर दीजिए। हम और ज्योतिरादित्य सिंधिया एक पेपर पर दस्तख्त करके दे दी। उसका पालन नहीं हुआ और क्लैश का कारण बना।

कमलनाथ ने किया पलटवार

लेकिन कमलनाथ ने दिग्विजय सिंह की बातों को ना करते हुए अपने सोशल मीडिया से पोस्ट सार्वजनिक करते हुए कहा की मध्य प्रदेश में 2020 में मेरे नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार गिरने को लेकर हाल ही में कुछ बयानबाजी की गई है। मैं सिर्फ़ इतना कहना चाहता हूँ कि पुरानी बातें उखाड़ने से कोई फ़ायदा नहीं। लेकिन यह सच है कि व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा के अलावा श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को यह लगता था कि सरकार श्री दिग्विजय सिंह चला रहे हैं। इसी नाराज़गी में उन्होंने कांग्रेस के विधायकों को तोड़ा और हमारी सरकार गिरायी।