मारुति E Vitara को प्रधानमंत्री ने दिखाई हरी झंडी जानिए कीमत

मारुति ने 26 अगस्त को अपनी पहली इलेक्ट्रिकल कर को लॉन्च किया जिसका नाम e vitara है गुजरात के हांसलपुर से इसको जापान , न्यू यॉर्क , यूरोप जिसे 100 से ज्यादा देशों में एक्सपोर्ट करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरी झंडी दिखाई है

मारुति की e vitara कार में 49kWh और 61kWh के दो बैटरी पैक ऑप्शन मिलेंगे। कंपनी का दावा है कि कार एक बार फुल चार्ज करने पर 500 किलोमीटर से ज्यादा चलेगी। इलेक्ट्रिक SUV का प्रोडक्शन फरवरी-2025 से सुजुकी मोटर गुजरात प्राइवेट लिमिटेड के प्लांट में हो चुका है।

क्या रहेगी कीमत / e vitara price

आपको बता दें कि अभि इनकी कीमत पूर्ण रूप से निर्धारित नहीं की गई है लेकिन कंपनी के द्वारा दिए गए कार्य से इसकी कीमतों का अंदाजा लगाया जा सकता है

  • मारुति ई विटारा के 49kWh बैटरी पैक वाले बेस मॉडल की कीमत 20 लाख रुपए (एक्स-शोरूम) रखी जा सकती है।
  • वहीं, हाई पावर वाली मोटर के साथ 61kWh बैटरी पैक वाले मॉडल की कीमत 25 लाख रुपए (एक्स-शोरूम) हो सकती है।
  • इसके अलावा ऑल व्हील ड्राइव (AWD) वर्जन की कीमत 30 लाख रुपए (एक्स-शोरूम) रखी जा सकती है।

वही माना जा रहा है कि भारतीय बाजार में ई विटारा इलेक्ट्रिक SUV का मुकाबला MG ZS EV, टाटा कर्व EV और हुंडई क्रेटा EV और महिंद्रा BE 6 जैसी गाड़ियों से रहेगा ।

क्या बोले प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कार्यक्रम के दौरान लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि आज मेक इन इंडिया में नया अध्याय जुड़ा है। अब विदेशों में चलने वाली इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर भी मेड इन इंडिया लिखा होगा। भारत को डेमोग्राफिक एडवांटेज है। हमारे पास स्किल वर्कफोर्स का बड़ा पूल है। जो हमारे हर पार्टनर के लिए विन-विन सिचुएशन बनाता है।

पैसा किसी का भी लगे मुझे इससे कोई लेना देना नहीं है। वो चाहे डॉलर हो या पॉन्ड हो या और करेंसी हो। लेकिन इससे जो प्रोडक्शन हो उसमें पसीना मेरे देशवासियों का होगा। जो प्रोडक्शन होगा उसमें महक मेरे देश की मिट्टी की होगी।

जापान की सुजुकी कंपनी भारत में मैनुफैक्चरिंग कर रही है। जो गाड़ियां बन रही हैं वो वापस जापान को एक्पपोर्ट की जा रही हैं। एक तरह से मारुति सुजुकी कंपनी मेक इन इंडिया की ब्रांड एम्बेसडर बन चुकी है।

आज पूरी दुनिया, भारत की ओर देख रही है। ऐसे समय में कोई भी राज्य पीछे नहीं रहना चाहिए। हर राज्य को इस अवसर का लाभ उठाना चाहिए। हिंदुस्तान आने वाले निवेशकों को इतना कन्फ्यूजन होना चाहिए कि वे सोचें, मैं इस राज्य में जाऊं या उस राज्य में। उन्होंने कहा मैं सभी राज्यों को निमंत्रण देता हूं, आइए, रिफॉर्म की स्पर्धा करें, प्रो-डेवलपमेंट पॉलिसी की स्पर्धा करें और गुड गर्वनेस की स्पर्धा करें। गर्व से स्वदेशी की ओर बढ़ चलें। मुझे आपका साथ चाहिए दोस्तों, 2047 तक हम विकसित भारत बनाकर रहेंगे।

Vikram Solar का शेयर निवेशकों को दे रहा सुनहरा मौका जानें आगे की बड़ी चाल

भारत में ग्रीन एनर्जी और सोलर पावर को लेकर मोदी सरकार लगातार प्रोत्साहन दे रही है इसी के बीच में भारतीय सोलर मैन्युफैक्चरिंग कंपनी Vikram Solar ने आज शेयर बाजार में दस्तक दी है ! कहां जा रहा है कि सरकार से कंपनी के पास मजबूत ऑर्डर बुक और उत्पादन क्षमता है, जो आने वाले वर्षों में इसकी ग्रोथ को सहारा दे सकती है।

बाकी इसकी लिस्टिंग को लेकर निवेशकों के बीच जबरदस्त उत्सुकता देखने को मिली। हालांकि शुरुआती प्रीमियम बहुत ज्यादा नहीं रहा, लेकिन कुछ ही घंटों में Vikram Solar Share price ने दम दिखाते हुए मजबूत बढ़त हासिल की है ।

कंपनी का शेयर BSE पर ₹340 और NSE पर ₹338 पर लिस्ट हुआ। यह कीमत कंपनी के IPO प्राइस ₹332 से महज 1.8 से 2.4 फीसदी ऊपर थी। देखने में भले ही यह प्रीमियम थोड़ा कमजोर लगे, लेकिन लिस्टिंग के कुछ ही समय बाद शेयर ने रफ्तार पकड़ ली और लगभग 9.2 फीसदी उछल गया। कुल मिलाकर, Vikram Solar का शेयर अपने इश्यू प्राइस से लगभग 12 फीसदी ऊपर ट्रेड करता दिखा।

IPO का रिस्पॉन्स

Vikram Solar का IPO निवेशकों के बीच काफी चर्चा में रहा। कंपनी ने ₹2,079.37 करोड़ जुटाने का लक्ष्य रखा था। इसमें से ₹1,500 करोड़ फ्रेश इश्यू और ₹579.37 करोड़ ऑफर फॉर सेल के जरिए आया। IPO के दौरान निवेशकों का उत्साह इतना ज्यादा था कि यह इश्यू 54.63 गुना सब्सक्राइब हुआ।

  • बड़े संस्थागत निवेशकों (QIB) ने 142.79 गुना बोली लगाई।
  • हाई नेटवर्थ निवेशकों (NII) का रिस्पॉन्स करीब 50 गुना रहा।
  • रिटेल निवेशक भी पीछे नहीं रहे और उन्होंने इसे लगभग 7.65 गुना सब्सक्राइब किया।

इन आंकड़ों से साफ है कि Vikram Solar में निवेशकों की दिलचस्पी बेहद मजबूत रही है।

₹2000 करोड़ का SBI लोन घोटाला! अनिल अंबानी के ठिकानों पर CBI की छापेमारी”

देश के मशहूर उद्योगपति और रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी के छोटे भाई अनिल अंबानी एक बार फिर सुर्खियों में हैं। 23 अगस्त केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने उनके घर और Reliance Communications (RCOM) से जुड़े कई दफ्तरों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई सीधे तौर पर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की शिकायत पर आधारित है, जिसमें अब CBI ने FIR भी दर्ज कर ली है। अनिल अंबानी और उनकी कंपनी पर लगभग ₹2,929 करोड़ बैंक फ्रॉड का आरोप लगाया गया है।

इससे पहले 23 जुलाई को (ED) ने भी अनिल अंबानी और उनकी कंपनियों पर शिकंजा काश था 23 जुलाई 2025 को ही ED ने अनिल अंबानी के सहयोगियों और कंपनियों के 35 से अधिक ठिकानों पर छापेमारी की थी। अब CBI का यह एक्शन जांच को और गंभीर बना देता है।

किन धाराओं पर FIR?

CBI ने इस मामले में अनिल अंबानी और उनकी कंपनी Reliance Communications (RCOM) के खिलाफ आपराधिक साजिश (IPC 120B), धोखाधड़ी (IPC 420) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत FIR दर्ज की है।

  • SBI से लिए गए कर्ज का गलत इस्तेमाल किया गया।
  • बड़ी रकम का बिजनेस में वास्तविक उपयोग नहीं हुआ।
  • कर्ज लौटाने से जानबूझकर बचा गया जिससे बैंक को भारी नुकसान हुआ।

SBI ने लगाया फ्रॉड का ठप्पा

सरकारी बैंक (SBI) ने 13 जून 2025 को रिलायंस कम्युनिकेशंस और अनिल अंबानी को फ्रॉड (Fraud Account) घोषित किया था। संसद में पेश डाटा के अनुसार, बैंक का कुल एक्सपोज़र लगभग ₹3,073 करोड़ है। इसमें करीब ₹2,227 करोड़ की मूल राशि और ₹786 करोड़ की बैंक गारंटी शामिल है। चूंकि यह लोन लंबे समय से डिफॉल्ट में था और इसके उपयोग में गड़बड़ियां पाई गईं, इसलिए बैंक ने सीधे CBI को केस सौंपा।
इसी आधार पर CBI ने FIR दर्ज की और 23 अगस्त की सुबह अनिल अंबानी के आवास व कार्यालयों पर CBI Raids शुरू हुईं। इस दौरान उनके परिवार के सदस्य भी घर पर मौजूद थे।

1983 में रिलायंस से जुड़े थे Anil ambani

जून 2005 मे मुकेश अंबानी और अनिल अंबानी के बीच बंटवारे हुआ , लेकिन किस भाई को कौन सी कंपनी मिलेगी इसका फैसला 2006 तक चला

मुकेश अंबानी 1981 और अनिल अंबानी 1983 में रिलायंस से जुड़े थे। जुलाई 2002 में धीरूभाई अंबानी का निधन हो गया। वो वसीयत लिख कर नहीं गए थे। मुकेश अंबानी रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन और अनिल अंबानी मैनेजिंग डायरेक्टर बने। नवंबर 2004 में पहली बार दोनों भाइयों का झगड़ा सामने आया था। परिवार में चल रहे इस विवाद से धीरूभाई अंबानी की पत्नी कोकिलाबेन परेशान थीं, जिसके बाद कोकिलाबेन ने बिजनेस का बंटवारा किया गया था।

मुकेश अंबानी के हिस्से में

बंटवारे के बाद मुकेश अंबानी के हिस्से में पेट्रोकेमिकल्स के कारोबार, रिलायंस इंडस्ट्रीज, इंडियन पेट्रोल कैमिकल्स कॉर्प लिमिटेड, रिलायंस पेट्रोलियम, रिलायंस इंडस्ट्रियल इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड जैसी कंपनियां आईं।

अनिल अंबानी के हिस्से में

छोटे भाई अनिल के पास आरकॉम, रिलायंस कैपिटल, रिलायंस एनर्जी, रिलायंस नेचुरल रिसोर्सेज जैसी कंपनियां थीं। इसके बाद मुकेश की लीडरशिप वाली कंपनियां लगातार ग्रो कर रही हैं, जबकि अनिल के हिस्से आई कंपनियों की हालत खराब होती गई और भी कई अधिक कर्ज में डूबते हुए चले गए !

23 अगस्त 2025 को हुई यह CBI Raid on Anil Ambani सिर्फ एक छापेमारी भर नहीं है, बल्कि भारतीय बैंकिंग सेक्टर को झकझोर देने वाला मामला है। ₹2,929 करोड़ SBI Loan Fraud Case और ₹17,000 करोड़ ED Probe दोनों मिलकर अब देश की बड़ी कॉर्पोरेट धोखाधड़ी जांचों में से एक बन गए हैं। जहां SBI ने साफ शब्दों में अनिल अंबानी और उनकी कंपनी को फ्रॉड अकाउंट घोषित किया, वहीं CBI और ED की यह संयुक्त कार्रवाई दिखाती है कि भारतीय एजेंसियां अब बड़े उद्योगपतियों के खिलाफ भी सख्ती बरतने में पीछे नहीं हटेंगी।